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तर्कसंगत संशोधन नहीं होने पर रलवे को दंश भुगतना पड़ेगा

एनएफआईआर के महामंत्री एम राघवैया ने रल प्रशासन को आगाह किया है कि छठे वेतनमान में खासकर रल परिचालन कार्य से जुड़े रल कर्मचारियों के नया वेतनमान के विसंगतियों को अगर इस वर्ष नवम्बर तक इसमें तर्कसगत संशोधन नहीं किया गया तो रल को इसका दंश भुगतना पड़ेगा। इसके लिए कर्मचारी मजबूरन धरना-प्रदर्शन के बाद इसके आगे का भी रास्ता चुन सकते हैं। इससे देश की आर्थिक स्थिति चरमरा सकती है। श्री राघवैया उक्त बातें खगौल के ऑफिसर क्लब में कहीं। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष गुमान सिंह के अलावा ईसीआर के केन्द्रीय नेता रामसूरत, प्रम शंकर चतुव्रेदी, शोमाकांत झा के एन शर्मा, बीपी सिंह के अलावा मंडल के नेता प्रदीप कुमार यादव, एसपी श्रीवास्तव उपस्थित थे। श्री राघवैया ने कहा कि रलकर्मी, टेक्िनकल, सुपरवाइजर, सहायक लोको पायलट, टेक्नीशियन, टीएनसी, सीएनडब्लू, स्टेनोग्राफर, स्टेशन मास्टर आदि के अलावा मीडिल लीडरशिप, सीनियर सेक्शन इंजीनियर सहित अन्य श्रेणी के वेतनमान में भारी विसंगति है। 16 हजार रलगाड़ी को चलाने में करीब 40 हजार सहायक लोको पायलट में अधिकांश डिपलोमा धारी एवं इजीनियरिंग के प्रमाणपत्र धारी है। इसके साथ भारी अन्याय हुआ है। आगामी वर्ष में 32 हजार करोड़ आय अर्जित करने की संभावना है। ऐसे कर्मी को नजरंदाज करना रल प्रशासन को भारी पड़ सकता है। इससे पूर्व एनसी घोष इंस्टीटय़ूट में ईस्ट सेंट्रल मेंस कांग्रेस की तृतीय सामान्य परिषद की बैठक हुई जिसमें 1सूत्री मांग का प्रस्ताव पारित किया गया जिनमें छठे वेतनमान में रलकर्मियों के नए वेतनमान में मौजूद विसंगति को दूर करने के अलावा शीर्ष वेतनमान श्रेणी के 15 प्रतिशत कर्मियों को राजपत्रित में पदोन्नति देने, निजीकरण पर रोक लगाने, नए कार्य हेतु नए पदों का सृजन करने, नई पेंशन स्कीम की समाप्ति, रात्रि एवं जी ट्रैक पेट्रोलमैन को रग्युलर, अस्पतालों में दवा की कमी को पूरा कराने व विशेष चिकित्सकों को बहाल करने की मांग शामिल है।

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