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माया ने मारी पलटी जमीन लौटाई

रायबरेली रेल कोच फैक्ट्री विवाद में मुख्यमंत्री मायावती ने पलटी खाते हुए फैक्ट्री के लिए आवंटित 18एकड़ भूमि रल मंत्रालय को वापस कर दी। शनिवार को इस संबंध में कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने यह जमीन इसलिए निरस्त की थी क्योंकि जमीन आवंटन का आदेश नियमानुकूल नहीं था। इसके लिए कैबिनेट की अनुमति नहीं ली गई थी जबकि केंद्र को जमीन देने का अधिकार केवल राज्य की कैबिनेट को है। इस बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे पर रविवार को प्रस्तावित अपना आंदोलन वापस न लेने का निश्चय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने कहा कि विकास बनाम विनाश की लड़ाई में यह पहली जीत है। मायावती ने बताया कि कोच फैक्ट्री के लिए जमीन 0 साल की लीज पर दी गई है। यह रल मंत्रालय के लिखित अनुरोध और विक्रय के आधार पर आवंटित की गई है। इस बाबत चिट्ठी भी रल मंत्रालय को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीन स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के कारण राज्य सरकार ने वापस ली थी। इस जमीन को गरीबों और भूमिहीनो में आवंटित करने की मांग भी की जाती रही है। उन्होंने बताया कि सभी तथ्यों की जांच उन्होंने अपने प्रमुख सचिव नेतराम से कराई और जांच रिपोर्ट को कैबिनेट में रखकर जमीन आवंटन का फैसला किया। अब यह जमीन कैबिनेट के फैसले के तहत दी गई है। मायावती ने इसके साथ ही केंद्र सरकार से रायबरली और अमेठी के बंद और खस्ता हाल उद्योगों के लिए पांच हाार करोड़ रुपए के विशेष पैकेा की मांग की है। इसके लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा गया है। उधर, मुख्यमंत्री ने यूपी में क्रीमी लेयर की आय सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपए करने का भी ऐलान किया है। इसके लिए जल्द ही आदेश जारी हो जाएंगे। देर शाम कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी। उन्होंने कहा कि वास्तव में ‘कांग्रेस एंड कम्पनी’ दलित विरोधी है। कांग्रेस के रहते दलितों का उत्थान संभव नहीं है।

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