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संकट में लघु एवं मझोले उद्योग

पिछले कई माह से चल रहे आर्थिक संकट का देश के छोटे उद्योगों पर गहरा असर पड़ रहा है। मोटे तौर पर लघु उद्योग इकाइयों के लोन आवेदनों में एक चौथाई की कमी आ गई है। यही नहीं, अधिकांश औद्योगिक इकाइयों ने र्का को मंजूर करवा लिया है लेकिन उसका वितरण लेने को तैयार नहीं हैं। एक प्रमुख राष्ट्रीय बैंक के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पिछले पांच-छह माह से चल रहे आर्थिक संकट का वास्तविक असर अभी तक खास नहीं दिखा है क्योंेकि पहले से मंजूर करो का वितरण इस अवधि के दौरान हो गया। अब आगामी छह महीनों के दौरान इसका ज्यादा असर दिखाई पड़ेगा। अधिकारी के मुताबिक पिछले कई महीने से मासिक आधार पर हासिल होने वाले लोन आवेदनों में कम से कम 25 फीसदी की कमी आ गई है। मामला यही तक सीमित नहीं है बल्कि मंदी के असर के चलते उत्पादन में भी कमी दर्ज की गई है। इस कमी के चलते अधिकांश छोटी औद्योगिक इकाइयों ने बैंकों से र्का तो मंजूर करवा लिया है लेकिन उसका वितरण फिलहाल लेने को तैयार नहीं हैं। बाहर बड़ी-बड़ी कंपनियां बैंकों ने र्का न मिलने का रोना रो रही हैं लेकिन लघु उद्योगों में हालात उल्टे हैं। उत्पादन घट जाने से कार्यशील पूंजी या टर्म लोन की तुरंत जरूरत ही बहुत घट गई है। लिहाजा, लोन मंजूर करवाकर हालातों के सुधरने का इंतजार किया जा रहा है।ं

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