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अन्न के लाले, 3 खड़िया बच्चे मरे

पेट्रोल-डीाल के दाम घटेंगे!ड्ढr नयी दिल्ली। विश्व बाजार में कच्चे तेल के दामों में निरंतर आ रही गिरावट देखते हुए पूरी संभावना है कि केंद्र सरकार जल्दी ही पेट्रोल, डीाल तथा एलपीजी के दामों में कमी करगी। शुक्रवार को कच्चे तेल का भाव 77.70 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। पिछले साल इस दिन भाव 81.31 डॉलर था। लेकिन जानकार सूत्रों के अनुसार डालर की कमी और डालर की तुलना में रुपये का बेहद कमजोर हो जाना अभी भी रुकावट का एक कारण है। स्मरणीय है कि केंद्र सरकार ने विगत 4 जून को विश्व बाजार में कच्चे तेल के भावों के 113 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के बाद पेट्रोल, डीाल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में क्रमश: पांच, तीन और 50 रुपये का इजाफा कर दिया था। इस बीच विरोधी दल कीमतें घटाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर चुके हैं। एजेंसीड्ढr इस बार में स्मरणीय है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा ने पिछले हफ्ते कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि यदि कच्चे तेल के दाम 68 डॉलर प्रति डॉलर पर आ जाए, तो सरकार पेट्रोल, डीाल और एलपीजी के दाम कम करने के संबंध में सोच सकती है। लेकिन तब से वे अपने बयान से पलट चुके हैं।ड्ढr अब देवड़ा कह रहे हैं कि कच्चे तेल का भाव 65 रुपये तक आने पर कीमतें घटाई जा सकती हैं। उनके हवाले से कुछ खबरं इस प्रकार की भी आईं कि वे 62 डॉलर प्रति बैरल के भाव का इंतजार कर रहे हैं। इंडियन ऑयल के प्रवक्ता ने कहा कि कीमतों के बढ़ाने के बावजूद तेल कंपनियों को घाटा तो ही रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत कम हो जाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। माना जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर पर आ जाती है तो पेट्रोल, डीाल बेचने वाली कंपनियों को नया घाटा होना बंद हो जाएगा। लेकिन सरकार क्या इससे पहले पेट्रोल डीाल की कीमतें कम करने का फैसला नहीं कर सकती? वस्तुत: चुनावी माहौल में केन्द्र सरकार पेट्रोल, डीाल की कीमतों में कमी कर वाहवाही लूट सकती है। इससे आम महंगाई कम करने में भी खासी मिदद मिलेगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रशासनिक फैसला होने की वजह से यह चुनावी आचार संहिता के दायर में नहीं आएगा।ड्ढr ---ड्ढr समाप्तड्ढr -- नक्सलियों क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच बैनड्ढr अजय शर्मा रांची राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए भाकपा माओवादियों से जुड़े चार संगठनों को बैन कर दिया है। इनमें एमसीसीआइ के अग्र संगठन क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच, नारी मुक्ित संघ, क्रांतिकारी किसान कमेटी और झारखंड एवन ग्रुप शामिल हैं। इन संगठनों को 15 अक्तूबर की तिथि से निबंधित घोषित किया गया है। सीएम मुख्यमंत्री शिबू सोरन की सहमति के बाद सरकार की ओर से इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी गयी है। दलील दी गयी है कि ये चारो संगठनों का उपयोग नक्सली किया करते हैं। ये नक्सलियों प्रचार-प्रसार विंग है। एमसीसीआइ की क्रांतिकारी किसान कमेटी सबसे निचला संगठन है। सबसे पहले गांववालों को इसी का सदस्य बनाया जाता है। एमसीसी का ही घटक है नारी मुक्ित संघ। इसके जरिये भी प्रचार-प्रसार का काम चलता है। गृह विभाग के उप सचिव सदानंद सहाय के हस्ताक्षर से प्रतिबंध लगाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गयी है।ड्ढr अधिसूचना में कहा गया है कि ये चारो संगठन लोक व्यवस्था बनाये रखने में हस्तक्षेप करते हैं। शांति के लिए घातक हैं। इनका सदस्य बनने, उन्हें चंदा देने तथा उनकी गतिविधियों से संबंधित कोई भी साहित्य या पत्रिका छापने या रखने को गैर कानूनी घोषित किया गया है। पलटीं माया, जमीन लौटायीलखनऊ। रायबरली रल कोच फैक्ट्री विवाद में मुख्यमंत्री मायावती ने पलटी खाते हुए फैक्ट्री के लिए आवंटित 18एकड़ भूमि रल मंत्रालय को वापस कर दी। शनिवार को इस संबंध में कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने यह जमीन इसलिए निरस्त की थी क्योंकि जमीन आवंटन का आदेश नियमानुकूल नहीं था।ड्ढr इसके लिए कैबिनेट की अनुमति नहीं ली गई थी जबकि केंद्र को जमीन देने का अधिकार केवल राज्य की कैबिनेट को है। इस बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे पर रविवार को प्रस्तावित अपना आंदोलन वापस न लेने का निश्चय किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने कहा कि विकास बनाम विनाश की लड़ाई में यह पहली जीत है। मायावती ने बताया कि कोच फैक्ट्री के लिए जमीन 0 साल की लीज पर दी गई है। यह रल मंत्रालय के लिखित अनुरोध और विक्रय के आधार पर आवंटित की गई है। इस बाबत चिट्ठी भी रल मंत्रालय को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीन स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के कारण राज्य सरकार ने वापस ली थी। इस जमीन को गरीबों और भूमिहीनो में आवंटित करने की मांग भी की जाती रही है। उन्होंने बताया कि सभी तथ्यों की जांच उन्होंने अपने प्रमुख सचिव नेतराम से कराई और जांच रिपोर्ट को कैबिनेट में रखकर जमीन आवंटन का फैसला किया। अब यह जमीन कैबिनेट के फैसले के तहत दी गई है। हिटीनक्सली मुठभेड़ में जवान शहीदड्ढr चतरा (सं)। स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही के हिंदीयाकला जाने के पहले और लौटने के बाद बीहड़ में सीआरपीएफ और नक्सलियों की मुठभेड़ हो गयी। इसमें एक हवलदार शहीद हो गया, एक माओवादी भी मारा गया। शहीद हुए हवलदार का नाम राशनीति प्रसाद बताया जाता है। वे 10 ई कंपनी के जवान थे। इस घटना की पुष्टि प्रतापपुर पुलिस और एएसपी अभिषेक ने की है। पता चला है भानू शाही का काफिला जसे ही हिंदीयाकला से प्रतापपुर पहुंचा, माओवादियों ने जंगल में तैनात जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ओर से गोलीबारी में सीआरपीएफ जवान को गोली लग गयी और थोड़ी देर बाद उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी।ड्ढr लातेहार में माओवादियों ने विधायक प्रतिनिधि का घर फूंकाड्ढr नक्सलियों की आपसी लड़ाई में एक उग्रवादी मरा देखें पेज 17 परघंटों ठप रखा ट्रेनों का परिचालन हिटी खलारी पिपरवार भूख से बिलबिलाते और दम तोड़ते आदिवासियों की मौत का अंतहीन सिलसिला अब गुमला आ पहुंचा है। पखवार भर के अंदर चतरा और गोड्डा जिले में हुई दर्जनों मौत भी सरकार का नींद न खोल सकी। कुपोषण और एनीमिया की चपेट में आ जाने के कारण गुमला जिले में खड़िया जनजाति के तीन मासूमों की मौत हो गयी। असमय मर तीनों बच्चे एक ही परिवार के हैं। इनकी चौथी संतान अस्पताल में अभी जीवन और मौत के बीच झूल रही।ड्ढr घटना गुमला जिले के रायडीह थानांतर्गत लुदामकोठी टोली की है। एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग पूरे राज्य में एनीमिया से बचने का अभियान चला रहा। लेकिन इन बच्चों को तो इसकी गोटी भी नसीब न हुई। प्रशासन हमेशा की तरह इस कत्लेआम का मूक गवाह बना बैठा रहा। मौत की यह कहानी बीते 11 अक्तूबर से शुरू हुई। उस दिन अंजनी कुमारी (छह वर्ष) की मौत हुई। तीन दिन बाद सुजीत खड़िया (साढ़े तीन वर्ष) और अजीत खड़िया (डेढ वर्ष) भी चल बसे। तीन-तीन लाडलों की एक के बाद एक लगातार हुई मौत की इस हृदयविदारक पीड़ा से पिता बालमोहन खड़िया और मां कुटी देवी उबर भी नहीं पाये थे कि उनकी चौथी संतान पुनीता (8 वर्ष) की हालत बिगड़ने लगी। घबराये बालमोहन और उसकी पत्नी पुनीता को लेकर गुमला सदर अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद पाया कि पुनीता के शरीर में खून की काफी कमी है। फलस्वरूप उसे डॉ सौरभ की देखरख में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।गरीब बालमोहन खड़िया के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वह पुनीता का समुचित उपचार करा सके। उसने बताया कि उसके घर में दूसरी मौत 14 अक्तूबर को पुत्र सुजीत खड़िया की हुई। वह उसकी अंतिम क्रिया कर लौटा ही था कि डेढ़ वर्षीय अजीत खड़िया भी नहीं बचाया जा सका।

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