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शेयर बाजार: 18 टॉप शेयरों से हाथ खींचा

भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों से लगातार गिरावट की चपेट में है। इसके पीछे कारण यह है कि पिछले साल जमकर निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अब बिकवाली पर उतर आए हैं। इसका प्रमाण यह है कि बीएसई में सूचीबद्ध तीस कंपनियों में से 18 बड़ी कंपनियों से एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी कम कर ली है। इनके द्वारा चालू वित्त वर्ष में पहली और दूसरी तिमाही के दौरान 11 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे जा चुके हैं। एफआईआई ने अब तक आईसीआई सीआई, टाटा स्टील, जयप्रकाश एसोसिएट्स जसी बड़ी कंपनियों के शेयर बेचे हैं। सितंबर माह के अंत तक एफआईआई ने आईसीआईसीआई से अपनी हिस्सेदारी कम कर 36.44 प्रतिशत कर ली जो कि इसके पूर्व की तिमाही में यह 38.85 प्रतिशत थी। इसका मतलब हुआ कि केवल तीन माह के दौरान विदेशी निवेशकों ने निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक की लगभग दो प्रतिशत की हिस्सेदारी बेच दी। इसी अवधि के दौरान टाटा स्टील की हिस्सेदारी में भी लगभग दो प्रतिशत की कटौती की है। दूसरी तिमाही के अंत तक यह हिस्सेदारी 1प्रतिशत से घटकर 17.65 प्रतिशत हो गई। जयप्रकाश एसोसिएट्स में तो अब केवल नाम मात्र के शेयर बचे हैं। कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 21.66 प्रतिशत की तुलना में अब 2.78 प्रतिशत रह गई है। आंकड़े बताते हैं कि एफआईआई ने इस वित्तीय वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में शेयरों की जमकर बिकवाली की है। इस दौरान एफआईआई ने कुल 11 अरब डॉलर के शेयर बेच कर मार्केट से पैसा बाहर निकाल लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंदी के चलते अब विदेशी निवेशकों का विश्वास भारतीय कंपनियों से भी उठ गया है। उन्हें लग रहा है कि अब बाजार में बने रहना उचित नहीं है क्योंकि संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ना तय है। दूसरी तरफ एफआईआई ने इसी अवधि के दौरान बीएसई में सूचीबद्ध दूसरी अन्य आठ कंपनियों के शेयर खरीदे हैं। इसमें मारुति सुजूकी, एनटीपीसी, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, एचडीएफसी, भेल, आदित्य बिड़ला समूह, हिंडाल्को और डीएलएफ शामिल हैं। जबकि अन्य चार कंपनियों में से एफआईआई ने आईटीसी, सत्यम और ग्रासिम से पहली तिमाही के दौरान अपनी हिस्सेदारी घटाई थी। इधर रिलायंस इंडस्ट्रीा में भी 0.14 प्रतिशत, विप्रो में 1.31 प्रतिशत और भारती एयरटेल में लगभग एक प्रतिशत की हिस्सेदारी बेच दी है। इसी तरह एफआईआई द्वारा अन्य दूसरी कंपनियों से भी हिस्सेदारी कम करने का सिलसिला जारी है।

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