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सड़क निर्माण में विभाग के अफसररुचि नहीं ले रहे

सिर्फ जनता ही नहीं, सरकार भी अब मान रही है कि पथ निर्माण विभाग के अधिकारी ही सड़क निर्माण में रुचि नहीं ले रहे। कोसी क्षेत्र की बाढ़ में क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण मामले में तो सरकार ने एक बड़े अधिकारी को अल्टीमेटम दे डाला है। पथ निर्माण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक में यह बात सामने आयी है कि राष्ट्रीय उच्च पथ प्रभाग के मुख्य अभियंता राजीव रंजन झा ने जब से पदड्ढr संभाला है, सूबे के राष्ट्रीय उच्च पथों की स्थिति काफी खराब हुई है।ड्ढr ड्ढr शिथिलता का आलम यह है कि मुख्य अभियंता ने सरकार के निर्देश के बावजूद बाढ़ प्रभावित जिलों के पथों का निरीक्षण प्रतिवेदन अब तक नहीं सौंपा है। श्री झा के इस रवैये से खफा पथ निर्माण सचिव ने श्री झा को निर्देशित सभी पथों का भ्रमण और समीक्षा कर सात दिनों के अन्दर स्थिति बताने को कहा है। उन्होंने कहा है कि पटना से मोकामा, बेगूसराय से महेशखूंट, कुरसेला से पूर्णिया, रामगढ़वा से रक्सौल, मुजफ्फरपुर बैरिया चौक से बोचहां और दरभंगा से जयनगर एनएच की स्थिति अत्यन्त ही दयनीय है।ड्ढr ड्ढr यही नहीं सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, वैशाली, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मोतिहारी, फारबिसगंज, बनमनखी, वीरपुर, जानकीनगर समेत उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में एनएच की स्थिति ठीक नहीं है। पथ निर्माण विभाग के सचिव एस. शिवकुमार ने श्री झा को लिखे पत्र में कहा है कि विभाग के प्रधान सचिव निर्देश दे चुके हैं कि वरीय पदाधिकारियों को सप्ताह में तीन दिन पथों का निरीक्षण कर प्रतिवेदन मुख्यालय को समर्पित करना है, पर उसपर अमल नहीं किया जा रहा। मुख्य अभियंता स्तर पर इस्टीमेट, टेक्िनकल और फिनान्सियल बीड भी मंजूरी के लिए लंबित है। किरासन का हिसाब न देने पर कोटे में होगी कटौतीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। किरासन का हिसाब नहीं देने पर जिलों के कोटे में कटौती होगी। सरकार ने इसके आवंटन, उठाव, वितरण और बची हुई मात्रा का मासिक ब्योरा देना हरक जिले के लिए अनिवार्य कर दिया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सूचना भेजे जाने के लिए खास तरह के फार्म उपलब्ध करा दिये हैं। विभाग ने जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को उनके यहां लाभार्थियों के बीच किरासन की पूरी मात्रा को बंटवाने का भी निर्देश दिया है।ड्ढr ड्ढr गौरतलब है कि राज्य में जन वितरण प्रणाली के तहत अंत्योदय, अन्नपूर्णा, बीपीएल और एपीएल परिवारों के लिए 53टन मार्करयुक्त किरासन तेल का आवंटन होता है। समीक्षा में पता चला कि अरवल, सारण, भागलपुर और बांका को छोड़ कर अन्य सभी जिलों में माइक्रो प्लान के तहत 0 प्रतिशत या उससे अधिक मात्रा में किरासन बंट रहा है। सूत्रों के अनुसार जिलों में बंटने वाले और बचे हुए किरासन का ब्योरा विभाग के पास नहीं रहने की वजह से अगले माह के आवंटन से लेकर भंडारण तक में कठिनाई होती है। इसी वजह से हरक जिले को इसका पूरा ब्योरा भेजना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि वहां किरासन की बची हुई मात्रा को देखकर ही अगला आवंटन दिया जा सके।

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