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300 टेंपरचरी और एंसीलरियों में 5000 बैठाये गये

ऑटोमोबाइल बाजार में मंदी को देखते हुए टाटा मोटर्स ने अपने जमशेदपुर प्लांट में वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में 1050 वाहनों की कटौती करने का निर्णय लिया है। अक्तूबर माह के प्रारंभ में कंपनी ने 7000 वाहन बनाने का टारगेट रखा था। उत्पादन में कटौती के कारण कंपनी ने तत्काल 300 टेंपररी मजदूरों तत्काल काम से बैठा दिया है। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में अभी करीब 3500 स्थायी, 3200 टेंपररी और करीब 3300 टाटा मोटर्स स्किल्ड ट्रेनी कार्यरत हैं। मंदी से टेंपररी और टीएमएसटी मजदूरों को नो वर्क , नो पे के साथ काम से ब्ैाठाये जाने की आशंका बलवती होती जा रही है। कंपनी के प्रवक्ता कैप्टन पीजे सिंह ने इस मामले में अभी कुछ भी कहने से इनकार किया है। इतना अवश्य उन्होंने कहा कि टेंपररी मजदूरों का नियोजन कंपनी का उत्पादन गिरने से प्रभावित हो सकता है। कंपनी पर मंदी का इस कदर असर रहा कि 6-अक्तूबर तक प्लांट पूरी तरह से बंद रहा। यह पहला मौका था जब दुर्गापूजा की छुट्टी भी कंपनी ने चार दिन दी।कंपनी को भरोसा था कि अक्तूबर के प्रथम सप्ताह से बाजार पीक पकड़ लेगा, और इस संभावना के मद्देनजर उसने करीब तीन माह से काम से बैठाये गये 3200 से अधिक टेंपररी श्रमिकों को काम पर वापस बुलाने की घोषणा की थी। लेकिन अब बाजार से विपरीत संकेत मिलते ही उसने टेंपररी श्रमिकों को ब्ैाठाना शरू कर दिया है। टाटा मोटर्स की एंसीलरियों की संस्था सिंहभूम इंडस्ट्रीा एसोसिएशन के नेता विकास मुखर्जी का कहना है कि बाजार में कमर्शियल व्हेकिल की मांग बहुत कम हुई है। टेंपररी मजदूरों को आशंका है कि कहीं छंटनी की प्रक्रिया और तेज न हो जाये। कंपनी पहले से कहती आ रही है कि वह बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पादन करगी। वाहनों की मांग कम होने से टेंपररी मजदूरों के नियोजन पर इसका असर पड़ सकता है। पहले जमशेदपुर में 7000 गाड़ी बनानी थी जबकि अब कंपनी मात्र 50 वाहन बनाने जा रही है। मासिक उत्पादन में और कमी हो सकती है। इसी लिए दुर्गापूजा में पहली बार 6-अक्तूबर तक छुट्टी दी गयी। एंसीलरियों के लिए भी चालू वित्तीय वर्ष बहुत खराब जा रहा है। जमशेदपुर में टाटा मोटर्स की 400 एंसीलरियां हैं जो सालाना 1000 करोड़ रुपये के कल-पुजरें की आपूर्ति करती हैं। इनमें करीब 20 हाार मजदूर काम करते हैं। कम कार्यादेश मिलने के कारण 5000 से अधिक टेंपररी, कैाुअल एवं ठेका श्रमिक एंसीलरियों से काम से बैठाये जा चुके हैं।ड्ढr विकास मुखर्जी का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में चालू वित्तीय वर्ष में 50 प्रतिशत कम उत्पादन लक्ष्य हमें दिया गया है। सरकार द्वारा ब्याज दर में वृद्धि और ऋण शर्ते बढ़ाने से खरीददार नये वाहन खरीदने में संकोच कर रहे हैं। इससे वाहनों की मांग पर बहुत बुरा असर पड़ा है। श्री मुखर्जी का कहना है कि अप्रैल 0तक बाजार में यही स्थिति बने रहने की आशंका है।ड्ढr

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  • Web Title: 300 टेंपरचरी और एंसीलरियों में 5000 बैठाये गये