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कवयित्री ने माकपा को आड़े हाथ लिया

हिन्दी कवयित्री कात्यायनी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल के रानीगंज में माकपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के आतंक से सांस्कृतिकमंच ‘मानविक’ द्वारा 10 अक्टूबर को आयोजित ‘गणमित्र सम्मान समारोह’ स्थगित करना पड़ा है। कात्यायनी का कहना है कि माकपा के इस सांस्कृतिक आतंकवाद ने उसकी नीतियों की कलई खोल दी है। ‘मानविक’ संस्था ने पांचवां गणमित्र सम्मान कवयित्री और सामाजिक-सांस्कृतिककर्मी कात्यायनी को देने की घोषणा की थी। उन्हें यह सम्मान जानी-मानी बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी के हाथों दिया जाना था। इस अवसर पर सांस्कृतिक आयोजन के दौरान स्थानीय रचनाकारों के अलावा दिल्ली, कोलकाता, पटना, रांची और भोपाल आदि से भी कई लेखक-कवि और संस्कृतिकर्मी हिस्सा लेने वाले थे। कात्यायनी के अनुसार, इस आयोजन के करीब हफ्ता भर पहले ही माकपा कार्यकताओं ने गुण्डागर्दी शुरू कर दी थी। संस्था से जुड़े लोगों और उनके परिवारानों को धमकाया गया। माकपा नेताओं का कहना था कि यह आयोजन दो शर्तो पर हो सकता है। पहला, इसमें महाश्वेता देवी न आएं क्यांकिवह वाममोर्चा सरकार की नीतियों की आलोचक रही हैं। दूसरी शर्त यह थी कि कात्यायनी माकपा के विरुद्ध एक भी शब्द मुंह से नहीं निकालेंगी और सम्मान ग्रहण करने के अतिरिक्त किसी प्रकार के राजनीतिक-सांस्कृतिक प्रचार कार्य में हिस्सा नहीं लेंगी। आयोजकों ने ये शर्ते मानने की बजाय आयोजन स्थगित करना मुनासिब समझा।ं

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