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..तो क्या दूसरे राज्यों की जमीन बांटेंगे

ेंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री रामविलास पासवान ने घोषणा की है कि उनकी सरकार बनी तो गरीबों को तीन बीघा जमीन दी जाएगी। गरीब इस घोषणा से खुश हो सकते हैं तो जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद शिवानंद तिवारी इसे विशुद्ध रूप से पासवान की बतफरोशी मानते हैं। तिवारी के मुताबिक अगर पासवान वादा पूरा करते हैं तो उन्हें पड़ोसी राज्यों से जमीन लेनी होगी। वे पूछते हैं-क्या यह संभव है? श्री तिवारी ने कहा कि पासवान और लालू प्रसाद में बतफरोसी की होड़ लगी है। ये दोनों सोचते हैं कि जब बतफरोसी ही करना है तो आगे-पीछे क्या सोचना। इसी धुन में कुछ से कुछ बोले जा रहे हैं। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के आंकड़े के मुताबिक बिहार की 42 फीसदी आबादी गरीबी रखा से नीचे है।ड्ढr ड्ढr हालांकि बिहार सरकार गरीबी रखा से नीचे की आबादी 62 फीसदी मानती है। अगर केंद्र सरकार के आंकड़े को ही मान लिया जाए तब भी सभी गरीब परिवारों को तीन बीघा जमीन नहीं दी जा सकती है। श्री तिवारी ने कहा कि राज्य की आबादी 10 करोड़ है। 42 के बदले 40 फीसदी का ही हिसाब रखा जाए तो राज्य में चार करोड़ लोग गरीबी रखा से नीचे है। इनमें से 10 फीसदी आबादी शहरी गरीबों की होगी। पांच सदस्यों की इकाई को एक परिवार माना जाए तो 72 लाख परिवारों को तीन बीघा के हिसाब से जमीन देनी होगी। इसके लिए दो करोड़ 16 लाख बीघा(एक करोड़ 40 लाख एकड़) जमीन चाहिए। राज्य में कृषि योग्य जमीन का रकबा सिर्फ एक करोड़ 30 लाख एकड़ है। श्री तिवारी ने कहा कि आज जो लोग खेती कर रहे हैं उन सबकी जमीन अगर गरीबों में बांट दी जाए तब भी 10 लाख एकड़ जमीन कम पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि बतफरोशी के हिसाब से इस धरती पर लालू और पासवान बेजोड़ हैं। इनके मुकाबले का कोई दूसरा मिले तो वह ईनाम का हकदार होगा।

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