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ओबामा के बढ़ते कदम

व्हाइट हाउस की दौड़ में जॉन मैक्केन की तुलना में बराक ओबामा और आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं। इसका एक प्रमुख संकेत ताजा राष्ट्रीय सव्रेक्षण में उन्हें छह अंकों की बढ़त मिलना है। सत्ताधारी रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के (पहले) कार्यकाल में विदेशमंत्री रह चुके कॉलिन पॉवेल ने 180 डिग्री का टर्न लेकर डेमोक्रेटिक प्रत्याशी ओबामा का समर्थन किया है, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत होने की संभावना है। पॉवेल का मानना है कि गए वर्षो में रिपब्लिकन पार्टी और बुश प्रशासन अत्यधिक अनुदार बन गए हैं और चुनाव प्रचार में रिपब्लिकन उम्मीदवार मैक्केन नकारात्मक रुख अपनाकर रो अलग-अलग तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों को लेकर मैक्केन के विचारों में बिखराव है। पॉवेल के समर्थन के बाद ओबामा द्वारा अपनी भावी जीत की स्थिति में उन्हें बड़ा ओहदा देने या सलाहकार बनाने की बात कहना असंभव नहीं है। इस पलटी में कुछ पर्यवेक्षक पॉवेल की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं सूंघ सकते हैं, पर रिपब्लिकन पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले पॉवेल ने अभी अचानक पलटी क्यों खाई और ओबामा को योग्य उम्मीदवार बताया? असल में, इसकी पृष्ठभूमि इराक युद्ध में ढूंढ़ी जा सकती है, जब आक्रामकता के पक्षधर उपराष्ट्रपति डिक चेनी और रक्षामंत्री रुम्सफील्ड जसे अनुदारवादियों ने विदेशमंत्री के रूप में पॉवेल की मध्यमार्ग के समर्थन की सलाह को दरकिनार कर दिया था। वह एशिया में अमेरिका के अति-आक्रामक रुख के पक्षधर नहीं थे। गहर मतभेदों के चलते बाद में उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया था। युद्ध के दौरान पॉवेल ने विदेशमंत्री के नाते अमेरिकी कदम को जायज ठहराया, पर बाद में इस दुस्साहस का जो खामियाजा देश की सेना व अर्थव्यवस्था को भुगतना पड़ा, उससे पॉवेल का मूल विचार ही सच के नजदीक साबित हुआ। यही वैचारिक साम्य ओबामा व पॉवेल दोनों को निकट लाया है। युद्ध की निर्थकता को ओबामा ने खुल्लमखुल्ला और पॉवेल ने परोक्ष रूप से रखांकित की है। ओबामा बदलाव के एक बहुत बड़े प्रतीक के रूप में उभर हैं। यदि वह जीतते हैं तो न सिर्फ एक अश्वेत व्यक्ित पहली बार अमेरिकी ताज पहनेगा, अमेरिका की घरलू और विदेश नीति में भी अनेक बदलाव देखने को मिलेंगे।ं

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  • Web Title: ओबामा के बढ़ते कदम