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बिजली संकट से परेशान बिहार: पांच वर्षो में जरूरत होगी पूरीं

बिहार अगले पांच वर्षो में बिजली की अपनी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षो की आपूर्ति के स्रेतों का खाका तैयार कर लिया है। बिहार की जरूरत अगले पांच वर्षो में 4000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। इस समय केन्द्र से 1553 मेगावाट का कोटा निर्धारित है, जबकि उपलब्धता 00-1100 मेगावाट की है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए 3000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की जरूरत है। सूबे के दोनों बिजलीघर कांटी और बरौनी से इस समय 150 मेगावाट बिजली मिल रही है। अगले तीन से चार वर्षो में यहां से कम से कम 300 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी। एनटीपीसी के बाढ़ बिजलीघर से विभिन्न चरणों में 450 मेगावाट, कहलगांव के दूसरे चरण से 200 और नार्थ कर्णपूरा से 300 मेगावाट बिजली मिलेगी। तिस्ता पनबिजली परियोजना में 150 मेगावाट जबकि एनएचपीसी के सुबनसिरी परियोजना से भी 200 मेगावाट की आपूर्ति होगी। सिक्िकम के सियांग परियोजना में बिहार की हिस्सेदारी 150 मेगावाट है।ड्ढr ड्ढr इस दौरान बिहार की अपनी पनबिजली परियोजनाओं से भी 250-300 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। सुपौल जिले में स्थित बिहार की महती डागमारा पनबिजली परियोजना की निर्माण प्रक्रिया अंतिम चरण में है। पड़ोसी राज्यों की परियोजनाओं में भी बिहार ने हिस्सेदारी खरीदी है। उड़ीसा के नेयवेली लिग्नाइट कारपोरेशन की परियोजना में 200 मेगावाट और झारखंड के तिलैया में लगने वाली परियोजना में 500 मेगावाट बिजली बिहार को मिलेगी। आंध्रप्रदेश की परियोजना में भी 1100 मेगावाट पर बिहार का दावा है। नवीनगर में 2000 मेगावाट परियोजना के लिए एनटीपीसी से एमओयू हो चुका है। बरौनी-कांटी बिजलीघर में एक हजार मेगावाट अतिरिक्त क्षमता भी जुड़ेगी। इसके अलावा नए बिजलीघर लगाने के एक दर्जन प्रस्ताव भी हैं जबकि पीरपैंती, कटिहार में नये बिजलीघर लगाने के प्रस्ताव पर काम हो रहा है।ं

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