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आम चुनाव में बाहुबलियों को जनता ने चटाई धूल

राजनीति के अपराधीकरण में उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका होने के लांछन को धोने के प्रयास में यहां के मतदाताआें ने इस चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों को लगभग नकार दिया है। लोकसभा चुनाव परिणामों ने राय में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों की सफलता की तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए इन दावेदारों के लिए संसद के दरवाजे को कम से कम पांच साल के लिए बंद कर दिया है। इस बार के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर अथवा निर्दलीय के तौर पर 120 से अधिक आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। इनमें अधिकतर ऐसे प्रत्याशी थे जिन पर कई मुकदमें लंबित हैं जबकि कई की छवि ठेठ माफिया तत्व की हैं। गाजीपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रत्याशी राधेमोहन सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बाहुबली प्रत्याशी अफजल अंसारी को 70 हजार से अधिक मतों से हराया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में तीन साल जेल में बंद रहे अफजल इस साल जनवरी में इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए हैं। वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने जेल से चुनाव लड़ रहे बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी को 13 हजार मतों से करारी शिकस्त दी। मुख्तार अंसारी भी कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में ही जेल में बंद हैं। इसके अलावा इन दोनों भाइयों पर हत्या, हत्या का प्रयास फिरौती के लिए अपहरण और लूट के दर्जनों मामले दर्ज हैं। बाहुबली प्रत्याशियों को दरकिनार करने के सिलसिले को बरकरार रखते हुए प्रतापगढ़ के मतदाताआें ने कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह को विजयश्री दिलाने में अहम योगदान दिया। उन्हांेने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के शिवकांत आेझा को 31 हजार 800 मतों से हराया। यहां अपनादल के अतीक अहमद को करारी हार का सामना करना पड़ा। अतीक पर बहुजन समाज पार्टी के विधायक राजू पाल की हत्या का आरोप है और वह उसी कांड में जेल में बंद हैं। लगभग यही हाल उन्नाव संसदीय क्षेत्र का रहा जहां आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अरूण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना को जमीन दिखाते हुए कांग्रेस की अन्नू टंडन ने विजय हासिल की। अन्ना कभी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के काफी करीबी थे और वह अन्ना से जेल में भी मिलने जाया करते थे। सपा विधायक रहते हुए अन्ना की तूती बोलती थी और अपराध की दुनिया में उनका बड़ा नाम था। बागपत में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह के खिलाफ बसपा के आपराधिक छवि वाले मुकेश शर्मा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। उनके भाई गुड्डू शर्मा बसपा के विधायक हैं और प्रचार के दौरान वह मतदाताआें को धमका कर अपने भाई के पक्ष में वोट मांग रहे थे। प्रचार के दौरान उनकी धमकी थी, भगवान तो मंदिर में बैठा है और यदि मेरे भाई को वोट नहीं दिया तो भगवान बचाने नहीं आएगा। सोचना और समझना कि राय में अभी तीन साल और हमारी सरकार है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के चर्चित चहेरे बाहुबली डीपी यादव को भी इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान पर उतरे डीपी यादव को सपा के धर्मेन्द्र यादव ने 32 हजार 687 मतों से हराया। बाहुबलियों के बुरे हश्र का गवाह श्रावस्ती संसदीय क्षेत्र भी बना जहां कांग्रेस के विनय पांडे ने बसपा के रिजवान जहीर को 42 हजार से अधिक मतों से हराया जबकि धरोहरा में कांग्रेस प्रत्याशी और केन्द्रीय इस्पात राय मंत्री जतिन प्रसाद ने बसपा के बाहुबली प्रत्याशी राजेश वर्मा को बाहर का रास्ता दिखाया। आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर समेत राय के कुछ संसदीय क्षेत्र इस दिशा में अपवाद बनकर उभरे। मुजफ्फरनगर में बसपा के बाहुबली प्रत्याशी कादिर राणा ने रालोद की अनुराधा चौधरी को 18 हजार मतों से हराया जबकि आजमगढ़ में मुस्लिम मतों के बटंबारे का फायदा उठाते हुए भाजपा के आपराधिक छवि वाले रमाकांत यादव ने बसपा के अकबर अहमद डंपी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया। इसी तरह दस्यु सरगना अंबिका पटेल उर्फ ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल ने सपा के टिकट पर मिर्जापुर से चुनाव लड़कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बसपा के अनिल मौर्य को 1हजार मतों से पराजित किया। ददुआ पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। जौनपुर सीट से बसपा के धनंजय सिंह भी लोकसभा में जाने में सफल रहे। फिरौती के लिए अपहरण और हत्या के कई मामले में नामजद धनंजय पर इस चुनाव में भी इंडियन जस्टिस पार्टी के प्रत्याशी बहादुर सोनकर की हत्या का आरोप लगा।

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