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पीड़ितों के लिए एक लाख टन और अनाजकी मांग

राज्य सरकार ने सूबे के बाढ़पीड़ितों के लिए एक लाख टन और अनाज मांगा है। यह केन्द्र द्वारा पूर्व में दिए गए सवा लाख टन खाद्यान्न के अतिरिक्त होगा। राज्य सरकार ने केन्द्र को बताया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कैम्पों में भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ राहत बांटने के लिए कम से कम एक लाख टन अनाज की तत्काल जरूरत है। पूर्व में केन्द्र से प्राप्त अनाज खत्म हो चुका है। राज्य सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों से एक लाख 20 हजार टन खाद्यान्न उठा चुकी है, जिन्हें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा चुका है।ड्ढr ड्ढr बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर फरवरी-मार्च तक चलने का अनुमान है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री के रूप में भी एक-एक क्िवंटल खाद्यान्न बांटना है। इसमें प्रत्येक परिवार को 50-50 किलो चावल और गेहूं बांटा जाना है। ऐसे में और खाद्यान्न की जरूरत होगी। यही नहीं राज्य सरकार मान रही है कि तय मानकों के विपरीत पीड़ितों को कम से कम तीन बार राहत सागग्री के रूप में अनाज देना आवश्यक है। अब तक के प्रावधान के तहत एक बार ही मुफ्त अनाज का वितरण किया जाता है।ड्ढr लंबे समय तक राहत शिविर चलाने और पीड़ितों के बीच मुफ्त बांटने के लिए अनाज की किल्लत है। बाढ़ के मद्देनजर राज्य सरकार ने केन्द्र से एक लाख टन खाद्यान्न की मांग की थी। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा के क्रम में बिहार को सवा लाख टन अनाज देने की घोषणा की। बिहार के एफसीआई के गोदामों में मौजूद 45 हजार टन खाद्यान्न को केन्द्र ने राहत अनाज के रूप में उपयोग करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था। गत वर्ष बाढ़ के दौरान बिहार को अतिरिक्त खाद्यान्न खरीदकर पीड़ितों के बीच बांटना पड़ा था। हालांकि इस वर्ष केन्द्र ने पीड़ितों के लिए नि:शुल्क खाद्यान्न दिया है।

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