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एक ही डिग्री के दो डाक्टरों पर अलग-अलग नियम!

एक ही डिग्री धारी दो डाक्टरों के साथ अलग-अलग नियम! है तो अजीबोगरीब पर यह सच होने जा रहा है। सूबे के स्वास्थ्य विभाग ने इसी तरह का निर्णय लिया है। मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डाक्टरों का 16 साल पर तीन प्रमोशन होगा जबकि जिलों में तैनात विशेषज्ञों (हेल्थ कैडर) को 18 साल पर तीसरा प्रमोशन मिलेगा। मेडिकल कॉलेजों के डाक्टरों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है जबकि जिलों में तैनात डाक्टरों के प्रमोशन नियमावली अभी विधि विभाग का चक्कर लगा रही है।ड्ढr ड्ढr वैसे सरकार ने फरवरी में ही हेल्थ कैडर के डाक्टरों को भी आश्वासन दिया था कि उन्हें जल्द से जल्द डायनेमिक एसीपी दे दिया जाएगा। इसी डायनेमिक एसीपी के तहत उन्हें टाइम बॉन्ड प्रमोशन मिलना है। पर जब क्रियान्वयन की बात आयी तो मेडिकल कॉलेजों के डाक्टरों ने बाजी मार ली। हेल्थ कैडर के डाक्टरों की मानें तो पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात कुछ डाक्टरों की ‘वीआईपी ट्रीटमेन्ट’ की आदत का फायदा पूर मेडिकल कॉलेज कैडर के डाक्टरों को मिलता रहा है।ड्ढr ड्ढr इस बार भी वही हुआ। हालांकि इस संदर्भ में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियो का तर्क है कि चूंकि मेडिकल कॉलेज में तैनात होने के लिए दो साल की पीजी डिग्री अनिवार्य है इसलिए उन्हें 18 की जगह पर 16 साल में तीन प्रमोशन की सुविधा दी गई है। हेल्थ कैडर में सामान्यतया एमबीबीएस डिग्रीधारी डाक्टर ही हैं। जबकि हेल्थ कैडर के डाक्टरों का कहना है कि जिलों में भी पीजी डिग्री वाले सैकड़ों डाक्टर पदस्थापित हैं। क्या उन्हें दूरदराज के गरीब मरीजों (वीआईपी ट्रीटमेन्ट नहीं) की सेवा करने के कारण आवश्यक लाभ से वंचित किया जा सकता है?

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