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एटमी सहयोग की वचनबद्धता नहीं

ाापान ने साफ किया है कि वह भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग करने के लिए बचनबद्ध नहीं है। भारत और जापान के बीच विदेशी मामलों, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को सुरक्षा सबंधी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जापान के प्रधानमंत्री तारो आसो के बीच चौथी वार्षिक नीति के समापन मौके पर इस पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत के बाद देशों की ओर से जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर ऊरा की बढ़ती मांग के संदर्भ में परमाणु ऊरा सुरक्षित, स्थायी और प्रदूषणरहित स्रेत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लेकिन घोषणापत्र में इसका उल्लेख नहीं किया गया कि जापान, भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग करगा या नहीं। संयुक्त घोषणापत्र में दोनों नेताओं ने लोकतंत्र, खुले समाज, मानवाधिकारों और विधि के शासन पर समान रूप से प्रतिबद्धता जताई। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भारत और जापान आपसी सहमति वाले मुद्दों पर रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य योजना योजना तैयार करेंगे और इस बाबत अपने-अपने प्रधानमंत्रियों को सूचित करेंगे। सुरक्षा सहयोग में सूचनाओं का आदान-प्रदान, एशिया प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मसलों के अलावा दीर्घकालिक सामरिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नीतिगत सहयोग, परिवहन सुरक्षा और तटरक्षक बलों के बीच सहयोग, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ मुहिम, आपदा प्रबंधन तथा नि:शस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार जैसे विषय शामिल हैं। यह तय किया गया कि दोनो देश इन मुद्दों पर विदेशमंत्री स्तरीय वार्ता के जरिए विचार-विमर्श करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच भी बैठक होगी। घोषणापत्र में कहा गया कि काले धन के कारोबार और आतंकवादियों को चोरी छिपे धन मुहैया कराने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए भी दोनों देशों के बीच एक चुस्त प्रणाली विकसित की जाएगी। आपदा प्रबंधन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक आपदाओं से निबटने के उपायों और अनुभवों के परस्पर आदान प्रदान पर भी सहमति बनी है। घोषणापत्र में दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निबटने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इसके तहत ही हिन्द महासागर में जापानी समुद्री सुरक्षा बल की गतिविधियों को बढ़ावा देकर उसकी महत्ता स्वीकार की गई है। दोनों नेताओं ने नि:शस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के प्रति वचनबद्धता दोहराते हुए कहा कि दोनों देश परमाणु मुक्त विश्व के लिए साझे प्रयास करेंगे। इससे पहले डॉ. सिंह ने जापान के अग्रणी उद्योग संगठन ‘निप्पो कईदानरेन’ की ओर से आयोजित सम्मान भोज के मौके पर जापान के व्यवसायियों और उद्यमियों को भारत में निवेश के प्रति विश्वास बढ़ाने का अनुरोध करते हुए हुए डॉ. सिंह ने कहा, ‘आप हमारी अर्थव्यवस्था पर भरोसा रखें। हम विदेशी निवेश के लिए सुरक्षित और अनुकूल माहौल मुहैया कराने के प्रति वचनबद्ध हैं।

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