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ओलंपिक से बाहर होने पर मनोज ने कहा, बेईमानी हुई

ओलंपिक से बाहर होने पर मनोज ने कहा, बेईमानी हुई

भारतीय मुक्केबाज मनोज कुमार पुरूषों के लाइट वेल्टर वेट (64 किग्रा) वर्ग के प्रीक्वार्टर फाइनल में मेजबान ब्रिटेन के जॉर्ज स्टॉकर के हाथों विवादित तरीके से हारकर ओलंपिक खेलों से बाहर हो गए। इस हार के बाद मनोज ने मैच में बेईमानी होने के आरोप लगाए।
     
छब्बीस वर्षीय मनोज ने एक्सेल ऐरिना में शनिवार रात हुए मुकाबले में अच्छी चुनौती पेश की लेकिन वह दुर्भाग्यशाली रहे कि उन्हें उनके प्रदर्शन के मुताबिक अंक नहीं मिले और ब्रिटिश मुक्केबाज 20-16 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर गया।
     
हार के बाद राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मनोज ने कहा कि यह निष्पक्ष नहीं लग रहा क्योंकि पहले दो दौर में 7-4 और 9-5 का स्कोर उसके (ब्रिटिश मुक्केबाज) प्रदर्शन के अनुरूप नहीं है।
     
मनोज ने कहा कि यह ओलंपिक टूर्नामेंट नहीं लगता बल्कि जिला टूर्नामेंट लगता है क्योंकि अगर रिंग में ग्रेट ब्रिटेन का खिलाड़ी होता है तो फिर उसके सामने कोई भी हो कोई फर्क नहीं पड़ता। यह जिला टूर्नामेंट की तरह है जहां बहुत बेईमानी होती है।
     
स्टॉकर ने पहला दौर 7-4 से जीता और दूसरे दौर में भी वह 9-5 से आगे रहे। तीसरे और अंतिम दौर में भारतीय मुक्केबाज ने आरपार की जंग शुरू करते हुए दमदार मुक्के लगाए और यह दौर 7-4 से जीत लिया लेकिन जजों के अंक देने के विवादास्पद तरीके के कारण मनोज को हार का मुंह देखना पड़ा।

भारतीय दल इस मुकाबले के नतीजे को लेकर नाराज है और उनका मानना है कि भारतीय मुक्केबाज को कुछ और अंक दिये जाने चाहिए थे। मुक्केबाज मनोज का मानना है कि उन्हें विजेता घोषित किया जाना चाहिए था। भारत मुक्केबाजों के मुकाबलों को लेकर पहले ही दो अपील दायर कर चुका है और टीम एक बार फिर फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है।
     
भारत के क्यूबाई कोच ब्लास इग्लेसियास फर्नांडीज ने कहा कि मनोज ने तीसरा दौर जीता लेकिन वह अन्य दो दौर भी जीत सकता था क्योंकि वह इन दोनों दौर में भी उसी तरह लड़ा था। उन्होंने कहा कि अंतिम दौर (मनोज के पक्ष में) 7-4 था। अन्य दौर क्यों नहीं सभी दौर एक जैसे थे। फैसले लेने के तरीके बहुत खराब थे।
     
भारत के मुख्य कोच गुरबख्श सिंह संधू ने कहा कि मेरा खिलाड़ी शानदार खेला। आपने खुद देखा कि क्या हुआ। उधर, स्टॉकर ने कहा कि वह नतीजे से खुश हैं लेकिन उन्हें लगता है कि वह जितनी अच्छी तरह खेल सकते थे, उतना नहीं खेले।

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