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क्रिकेट में भी ग्लोबल मंदी की मार

या भारतीय क्रिकेट भी ग्लोबल मंदी की चपेट में आ चुका है? यह सवाल देश के सबसे अमीर खेल के बारे में कुछ अटपटा जरूर लग सकता है लेकिन संकेत तो कुछ ऐसे ही मिल रहे हैं। आईपीएल के साथ पेप्सी कम्पनी ने जब करोड़ों का करार तोड़ा, तब भी यह सवाल उठा था। लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इंग्लैण्ड सीरीज के लिए प्रायोजक नहीं मिलने के बाद फिर यही सवाल उठ रहा है कि क्या हर साल करोड़ों कमाने वाले भारतीय क्रिकेट बोर्ड को भी आर्थिक मंदी के दौर से गुजरना पड़ेगा? इंग्लैण्ड टीम के आने में कुछ ही दिन बचे हैं और पहला वन डे भी 14 नवम्बर को राजकोट में खेला जाना है। इस सीरीज के मैचों की मेजबानी करने वाले लगभग सभी एसोसिएशन मुख्य प्रायोजक का नाम न मिलने से काफी परशान हैं, क्योंकि टिकटों पर प्रायोजक का होलोग्राम लगाया जाना अनिवार्य होता है। लेकिन स्पांसर का नाम न तय होने से मजबूरन बीसीसीआई सचिव के निर्देश के बाद राजकोट मैच के लिए सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन अपनी सील से टिकट छपवा रहा है। ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि टिकटों के छपवाने का काम पहले ही काफी विलंबित हो चुका है। बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा कि इस सिरीज के मैचों की मेजबानी करने वाले अन्य संघों को भी एक दो दिन में अपना स्टाम्प लगाकर टिकट छापने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश मिल जाएँगे। इस सिरीज के लिए प्रायोजक का नाम अब तक क्यों नहीं घोषित किया गया इस बार में बीसीसीआई के अधिकारी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। लेकिन चर्चा यही है कि ग्लोबल मंदी के कारण ही कम्पनियाँ क्रिकेट में अपना पैसा लगाने में हिचक रही हैं। इसके अलावा दर्शकों की क्रिकेट के प्रति बेरुखी भी ‘कोढ़ में खाज’ का काम कर रही है। मोहाली में आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत पाँचों दिन मजबूत स्थिति में रहा और उसके सभी खिलाड़ियों ने दोनों पारियों में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन तब भी दर्शकों ने स्टेडियम का रुख नहीं किया। पहले दिन से पाँचवें दिन भारत को जीत मिलने तक ज्यादातर गैलरी खाली ही पड़ी रहीं, जिससे न सिर्फ आईसीसी बल्कि बीसीसीआई को भी काफी हैरानी हुई। टेस्ट क्रिकेट को दर्शकों ने नकार कर बीसीसीआई की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इंग्लैण्ड की टीम को भारत दौर पर सात एक दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय मैचों के अलावा दो टेस्ट मैच भी खेलने हैं। ऐसा नहीं कि इस सिरीज के लिए बोर्ड को कोई प्रायोजक ही न मिले। लेकिन यह भी सच है कि हाल के वर्षो में इससे पूर्व उसे प्रायोजक ढूँढ़ने और उसका ऐलान करने में इतना समय नहीं लगा। साफ है कि ग्लोबल आर्थिक मंदी की मार इस बार क्रिकेट को भी पड़ी है।ं

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  • Web Title: क्रिकेट में भी ग्लोबल मंदी की मार