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क्लार्कचच कचचो भरोसा, ऑसीज करेंगे बाउंस बैक

मोहाली में खेले गए दूसरे क्रिकेट टेस्ट में भारत के हाथों मिली करारी हार के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई उपकप्तान माइकल क्लार्क निराश नहीं हैं। क्लार्क को पूरा भरोसा है कि उनकी टीम चार टेस्ट मैचों की इस सीरीज में शानदार वापसी करेगी। क्लार्क ने कहा कि वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई टीम वर्ष 2005 का प्रदर्शन नहीं दोहराएगी जिसमें 0-1 से पिछड़ने के बाद विश्व चैम्पियन टीम एशेज सीरीज हार गई थी। उन्होंने कहा, ‘हालांकि हालात वर्ष 2005 के एशेज सीरीज जैसे बन गए हैं जिसमें हमें अंतत हार का मुंह देखना पड़ा था। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस सीरीज का परिणाम भी वैसा ही होगा। हमारी टीम में अभी भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने व्यक्ितगत प्रदर्शन से टीम को जीत दिला सकते हैं। इसके लिए टीम को थोड़ा सा प्रयास करना होगा। हालांकि दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई टीम गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ही क्षेत्रों में असफल रही। अब जब उसके खिलाड़ी तीन दिन की छुट्टियां बिताकर लौटकर भारत के रिवर्स स्विंग, फिरकी और आक्रामकता का मुकाबला करने की रणनीति बनाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम को भारतीय बल्लेबाजों के बल्ले का मुंह बंद करने के लिए उन पर दबाव बनाने का कोई उपाय खोजना पड़ेगा। वर्ष 2005 के बाद से कंगारू मोहाली से पहले कभी भारी अंतर से नहीं हारे हैं। लेकिन इसके बावजूद क्लार्क को पूरा भरोसा है कि उनकी टीम विश्व की नम्बर एक टीम बनी रहेगी। क्लार्क ने कहा, ‘सच्चाई यह है कि हमारे लिए यह पहला टेस्ट नहीं है जिसमें हमें हार मिली है और निश्चित रूप से यह आखिरी भी नहीं होगा।’ उन्होंने कहा, ‘भारत में अपने अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि अब तक के प्रदर्शन के आधार पर किसी भी टीम की क्षमता का आकलन नहीं किया जा सकता। ऐसा करना जल्दबाजी होगी। क्योंकि चीजें अचानक बदलती हैं। हमारे पास पर्याप्त अनुभव है और हमें यहां की स्थितियों की अच्छी तरह से जानकारी भी है। दाहिने हाथ के बल्लेबाज क्लार्क इस सीरीज में अभी तक कोई बड़ा कमाल नहीं कर सके हैं। वह बेंगलुरु टेस्ट के दौरान दो बार नाकाम रहे थे जबकि मोहाली में भी वह पहली पारी के दौरान आखिरी ओवर में अमित मिश्रा के हाथों आउट हो गए थे। उन्होंने कहा, ‘जब मैं अपने प्रदर्शन को देखता हूं तो मुझे बहुत निराशा होती है क्योंकि मैं अपनी आशा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाया। पहले दो टेस्ट के दौरान मेरी गेंदबाजी ठीक रही, लेकिन तीसरे टेस्ट में अपनी टीम को जीत में मदद करने के लिए मुझे अपनी गेंद से थोड़ा और प्रयास करना होगा।’ 27 वर्षीय क्लार्क ने कहा, ‘दिल्ली में भारतीय टीम का पिछला रिकॉर्ड अच्छा रहा है और मैं इसे एक बड़ी चुनौती के रूप में लेना चाहता हूं। हमें यह अच्छी तरह से पता है कि दिल्ली के टेस्ट में हमें प्रतिद्वंद्वी टीम के कुछ अच्छे फिरकी और बेहतरीन रिवर्स स्विंग कराने वाले गेंदबाजों का सामना करना पड़ेगा।

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