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पंचायती राज संस्थाएं: अरबों रुपएका गोलमाल

पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों में अरबों रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है। एक काम का दो बार भुगतान। किसी योजना की राशि कहीं और खर्च। मोबाइल और भत्ते के नाम पर खजाने को चपत। सरकारी धन की सेल्फ चेक से निकासी। प्रधान महालेखा परीक्षक (पीएजी) ने मार्च, 07 तक की ऑडिट रिपोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं द्वारा खर्च की गयी राशि में भारी गोलमाल का खुलासा किया है। बुधवार को रिपोर्ट जारी करते हुए पीएजी ए.के.सिंह ने कहा कि अधिकतर संस्थाओं के पास एकाउंट बुक तक नही है। पता नहीं चलता कि विकास राशि कहां गयी?ड्ढr ड्ढr पीएजी ने पंचायत समितियों को प्रखंड कार्यालयों से नियंत्रण से अलग करने, ग्राम पंचायतों द्वारा वसूले जाने वाले टैक्स की दर तय करने, नया एकाउंट कानून बनाने, पंचायती राज विभाग के माध्यम से अनुदान देने, वित्तीय प्रबंधन सुधारने के लिए पंचायती संस्थाओं में बड़े पैमाने पर योजना-एकाउंट के जानकार कर्मियों की तैनाती और पंचायतों व शहरी निकायों के लिए दो उच्चस्तरीय कमेटी बनाने के सुझाव दिये हैं। स्थानीय लेखा परीक्षक डी. जयशंकर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पीएजी श्री सिंह ने कहा कि अनुदान राशि का सही उपयोग नहीं होने से बड़े पैमाने पर राजस्व की क्षति हुई है। शहरी निकायों में 263 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिला। दस जिला परिषदों ने 3रोड़ रुपये, 60 पंचायत समितियों ने 26.71 करोड़ और 1ग्राम पंचायतों ने 7.रोड़ रुपये लेकर भी क्रमश: 3210, 354और 2357 योजनाओं को पूरा नहीं किया।ड्ढr ड्ढr स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर मद में 27 शहरी निकायों ने 10.40 करोड़ रुपये वसूले लेकिन मात्र सवा करोड़ रुपये ही जमा कराये। हुलासगंज के सुराजपुर में 50 हजार रुपये से खरंजा और नाली निर्माण के लिए ग्राम पंचायत ने 46 हजार और पंचायत समिति ने 76 हजार रुपये खर्च किये। सीवान, सारण, नालन्दा, मधुबनी, जहानाबाद और अरवल जिला परिषदों ने संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में एससी-एसटी के लिए मिले 5.61 करोड़ रुपये दूसर कार्यो पर खर्च कर दिये। दरभंगा नगर निगम में मोबाइल पर 8.44 लाख रुपये और गया नगर निगम में वार्ड पार्षदों को भत्ते के नाम पर खर्च 3.21 लाख रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा है।ं

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