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आसमान

चंदा मामा और चंद्रयान के साथ अब एचइसी का नाम भी जुड़ गया है। देश की प्रगति और चंद्रमा तथा चंद्रयान का जब भी नाम आयेगा तो एचइसी इससे अछूता नहीं रहेगा। दर असल एचइसी ने धरा के आगे भी अपनी धाक जमा दी है। चंद्रयान को जिस लांचिंग पैड से छोड़ा गया उसका निर्माण एचइसी में ही किया गया था। इसके पूर्व भी एचइसी ने इसरो की कई जरूरतों को पूरा किया है। इसकी सफलता को देखते हुए इसरो ने अपने चंद्रयान- टू के लिए एचइसी से भी लांचिंग पैड का निर्माण कर रहा है। इसका निर्माण अंतिम चरण में है। इसरो से एचइसी को लांचिंग पैड के चार प्रोजेक्ट का काम मिला था। लेकिन इस काम को पूरा करने के लिए यहां के अधिकारियों को काफी मेहनत करनी पड़ी है। लांचिंग पैड के निर्माण के लिए सर्व प्रथम मेकन ने डिााइन तैयार की थी। पहली लांचिंग् पैड इसी डिााइन एवं मेकन के परामर्श से ही तैयार किया गया। बाद में इसरो ने इसका काम सीधे एचइसी को दिया। इसके बाद से एचइसी ने अपना परचम लहराया। अधिकारियों के अनुसार लांचिंग पैड के उपकरणों के निर्माण के बाद इसे एक प्लांट से दूसर प्लांट ले जाने में काफी परशानी हो रही थी। कारण इसकी लंबाई और चौड़ाई काफी थी। इस कारण प्लांट के कई गेट को चौड़ा एवं ऊंचा करना पड़ा था। उपकरण तैयार होने के बाद जब इसकी आपूर्ति शुरू की गयी, तो एचइसी चेक पोस्ट के बाहर ट्रेलर ले जाने में भी परशानी हुई थी। इस कारण रातो रात चेक पोस्ट का डिवाइडर तोड़ना पड़ा।ड्ढr अधिकारियों के अनुसार इस सफलता से एचइसी ने साबित कर दिया कि वह देश के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार है। भविष्य में जटिलतम काम करने को भी कंपनी तैयार है।ड्ढr देश और एचइसी पर गर्व है: पिल्लइड्ढr एचइसी के सीएमडी जीके पिल्लइ ने चंद्रयान के सफलता पूर्वक छोड़े जाने को एतिहासिक दिन बताया है। उन्होंने कहा कि देश के साथ आज एचइसी व मेकन भी गर्व कर रहा है। इस मिशन में एचइसी ने भी अपना योगदान दिया है। एचइसी के इंजीनियर व कामगार पूर देश में अव्वल हैं। यह बात कई बार साबित हो गयी है। भविष्य में हम किसी भी चुनौती का सामना करने के तैयार हैं। शब्द: 70ड्ढr मेकन ने टर्न की पर लिया था कार्यादेशड्ढr ड्ढr रांची। जिस लांचिंग पैड से चंद्रयान को छोडा़ गया है उसकी डिजाइन मेकन ने तैयार की थी। यह पूरा प्रोजेक्ट मेकन ने टर्न की आधार पर प्राप्त किया था और एचइसी में इसका निर्माण कराया था। मेकन प्रबंधन के अनुसार इस लांचिंग पैड की लंबाई 82.5 मीटर है और इसमें चार लाइटिंग कंडक्टर और कई उपकरण लगाये गये हैं। यह अपने आप का पहला लांचिंग पैड है। इसमें पूरी तरह भारतीय तकनीक का उपयोग किया गया है। इसे स्थापित करने में 12000 टन सीमेंट, 15000 टन स्टील, 10000 टन के उपकरण एवं 1000 किमी का उपयोग किया गया है। कंपनी के संचार प्रमुख राणा चक्रवर्ती ने बताया कि मेकन को इसका कार्यादेश 1में मिला था और 2003 में इसे पूरा किया गया। मेकन ने इस सफलता के लिए इसरो एवं सभी मेकन कर्मियों को बधाई दी है।ड्ढr

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