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राजरंग

ाोगाड़ फंडा की जय हो..ड्ढr गुलदस्ता आपका, स्वागत हमारा। स्वागत का अंदाज कुछ एसा हो तब क्या कहने। र्फा कीािये कि आप कहीं जा रहे हों और सामने से कोई बड़ा क्रिकेट स्टार या फिल्म स्टार चला आये। जब एसा हो तो क्या हो। आप तो अकबका कर रह जाइयेगा ना। आप चाहियेगा कि आपके हाथ में एगो गुलदस्ता होता, तो सामनेवाले का स्वागत हो जाता। तनी फोटुओ खींचा जाता। एसा किसी ने सोचा, आउर वइसा होइयो गया। अब कल्हे की ही बात लीजिये। अपने नेता जी (भइया जी) दिल्ली जा रहे थे और अपना क्रिकेट का हीरो स्टार जहाज से यहां पहुंच रहे थे। भइया जी के लिए अपने क्रिकेट के हीरो के स्वागत का इससे माकूल समय आउर क्या हो सकता था। देश को विजय दिलाकर लौट रहे थे हीरो। लेकिन भइया जी कौनो स्वागत के लिए हवाई अड्डा थोड़िये गये थे। उनको तो अपने जहाज धरके उड़ना था। अब का करते बेचार। उनका लेफ्टिनेंट आनन-फानन में एगो गुलदस्तवा का जोगाड़ करिये लिया। अपने भइया जी तड़ से उसी गुदस्तवे को क्रिकेट के हीरो को थमा दिये। स्वागत का स्वागत हो गया और गुलदस्ता का जोगाड़ हो गया। बाद में पता चला कि उ गुलदस्तवा फिर उसी जगह पहुंच गया, जहां से लिया गया था। एक्चुअली उ गुलदस्तवा कई महीना से एयरपोर्ट की एक दुकनवे में सजाकर रखल था। वही समय पर काम आया।

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