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मोटापा वरदान या अभिशाप

मोटापा तरक्की और समृद्धि तले फली-फूली आकृति को कहते हैं। मोटापा वैसे गरीब का घर न देखकर ऊंची हवेली और लम्बी चौड़ी बाउंड्री का चुनाव करता है। कुछ लोग मोटापे के पीछे पड़े हैं। मोटापे का कुछ हुआ है न होगा। मोटापा अमर बेल की भांति है जड़ मिलती नहीं पत्ते होते नहीं फल-फूल कभी लगे नहीं। प्रभाव बना का बनाया हुआ। मोटापे का वरदान हर किसी को नहीं मिलता। मोटापे पर चमड़ी फूल कर कांतिमय हो जाती है। चर्मरोग तो होते ही नहीं। डॉक्टर तो मोटापे को मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं। मोटा व्यक्ित डॉक्टर का अच्छा मित्र और पक्का ग्राहक होता है। मोटापे से दिल के रोग, फेफड़े के रोग, ब्लड प्रेशर, शूगर आदि होते हैं। आदि में अनन्त रोग आते हैं। लालू प्रसाद की मालगाड़ी के डिब्बे भी कम हो जाएं। अब सुनते हैं कि कैंसर का खतरा भी इस मोटापे में बहुत ज्यादा है। कल से एड्स का खतरा भी चस्पा हो सकता है। जो मोटापा इतने रोगों का वाहक है वह रोगों का टायटैनिक माना जाना चाहिए। मोटापे के दूसर पक्ष पर भी ध्यान देना चाहिए। मोटा व्यक्ित व्यर्थ की आवारागर्दी नहीं करता। इस आशय में चरित्र उत्तम होता है। घर पर बैठ कर कार्य व्यवहार व्यापार दुरुस्त करता है। लड़का झगड़ता नहीं यानी वह शांतिपूर्ण सद्भावना का व्यवहार करता है। मोटे व्यक्ित जिद हठ या विशेष अपेक्षा भी नहीं करते। फैशन इत्यादि का शौक नहीं नुसरत फतह अली और टुनटुन को छोड़कर गीत-संगीत-नृत्य से लगाव नहीं। खेल-कूद में भार उठाना, फेंकना, धकेलना उनके वश और कस के कारण संभव है। मोटे व्यक्ित दीघायु तो नहीं मगर सुखी जरूर होते हैं। वे व्यर्थ में अस्पताल का पलंग नहीं तोड़ते और घर के लोगों पर आर्थिक बोझ भी नहीं डालते हैं। लोग लेख पढ़कर दुआ करने लगेंगे- भगवान हमार पेरट्स को मोटा करके मारना। सेवा न कराए न आर्थिक गड्ढा करके जाए। मोटे पहलवानों ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ में भारी धूम मचाई है। सूमो कुश्ती चीन-ाापान की इसी कैटेगरी की है। मोटापे और मोटे को नमन करता हूं सबको लाभान्वित कर मुझे दरिद्रता ही दे।

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