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नई तकनीक से विकलांगों को मिलेगी नई जिंदगी

नई तकनीक से विकलांगों को नया जीवन मिलेगा। ये बातें सोमवार को विकलांग भवन अस्पताल में कृत्रिम अंगों पर आयोजित संगोष्ठी में डा. शैलेश कुमार ने कहीं। डा. कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक हाथ और माइक्रो कृत्रिम पैर के जरिये विकलांगों आत्मनिर्भरता में वृद्धि होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ डा. विजय कुमार ने कहा कि कृत्रिम हाथ से जरिए विकलांग लोग खाना खाने से लेकर दुनिया का सभी काम कर सकेंगे। अब उनके दिमाग में हीनभावना जागृत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि बिहार कॉलेज ऑफ फिाियोथेरापी एवं अकुपेशनल थेरापी विकलांग भवन अस्पताल ने नेवरास्का (यूएसए) की कंपनी इनोवेटिव प्रोस्थेटिक्स एंड आर्थोटिक्स के जरिए आम लोगों को यह तकनीक मुहैया करायी है।ड्ढr ड्ढr इसके जरिये राज्य में पहली बार आधुनिक तकनीक से कृत्रिम अंगों का निर्माण किया जाएगा। इस मौके पर विकलांग भवन अस्पताल के निदेशक डा. मोहन प्रसाद ने बताया कि अभी भारत में पुरानी पद्धति के जरिए अंगों का निर्माण होता है। इन तकनीक के इस्तेमाल से विकलांगों की कार्यक्षमता बढ़ जाएगी। इस मौके पर इनोवेटिव प्रोस्थेटिक्स एंड अर्थोटिक्स के अध्यक्ष राकेश कुमार ने लागों को कृत्रिम यंत्रों से अवगत कराया और उनके उपयोग के बार में बतलाया। उन्होंने कृत्रिम यंत्रों द्वारा कई वस्तुओं को उठाकर और पकड़कर दिखाया। पटना निवासी श्री कुमार जो 26 वर्षो से विकलांग है उन्होंने बताया कि अमेरिका में इस तकनीक की कीमत 12 लाख रुपए है, जबकि यहां इसे मात्र 25 हाार रुपए में उपलब्ध कराया जाएगा। इस मौके पर डा. संजीव कुमार, डा. मोहन प्रसाद, डा. उदय शंकर प्रसाद, राकेश कुमार, डा. नरन्द्र कुमार सिंह, डा. उदय शंकर प्रसाद, डा. शांति सिंह, डा. जी एस शर्मा, डा. आलोक कुमार आदि मौजूद थे।

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