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महाराष्ट्र व बिहार की घटना से आहत हैं बुद्धिजीवी

महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय खासकर बिहारी छात्रों की मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा की गयी पिटाई से राज्य में छात्रों का आक्रोश भड़क गया है। पूरा सूबा इस आग में जल रहा है। राज्य का बुद्धिजीवी वर्ग भी इससे पूरी तरह आहत है। इस तबके का कहना है कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं होना चाहिए। हिंसा से किसी समस्या का निदान भी नहीं हो सकता है। क्षेत्रवाद को हवा देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इस मसले को हल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को आगे आना होगा। बिहारी छात्रों को भरोसा दिलाना होगा कि वे देश के किसी भी हिस्से में बेरोकटोक जा सकते हैं।ड्ढr ड्ढr गांधीवादी विचारक व गांधी संग्रहालय के सचिव डा. रजी अहमद कहते हैं कि यह बहुत गलत हो रहा है। मुल्क के लिए नुकसानदेह है। इस तरह से क्षेत्रवाद को हवा मिलेगी। हालांकि उन्होंने महाराट्र में छात्रों की पिटाई के खिलाफ बिहार व यूपी में भड़की हिंसा को भी उचित नहीं बताया है। इससे मसला हल नहीं होने वाला है। रलवे पर हमला करने से क्या होगा। वह ठाकर की संपत्ति तो है नहीं। डा. अहमद कहते हैं कि आर्थिक नीतियों का यह नतीजा तो सामने आना ही था। बेकारों की फौज बढ़ रही है। सरकारी नौकरी है नहीं। हर राजनीतिक दल को एकमत होकर इसका निदान ढूंढ़ना होगा। नहीं तो हिन्दुस्तान बर्बाद हो जाएगा।ड्ढr ड्ढr साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कवि डा. अरुण कमल ने महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय खासकर बिहारी छात्रों की पिटाई की भर्त्सना करते हुए कहा है कि हिंसा का जवाब हिंसा नहीं है। इससे किसी समस्या का हल भी नहीं निकलता है। जाति, धर्म व क्षेत्रीयता के नाम पर होने वाले अत्याचार जघन्य हैं। यह देश हम सबका है। संविधान में हमें देश के किसी हिस्से में रहने व काम करने की आजादी दी है। यह आजादी तो हर किसी को मिलनी चाहिए। पटना विश्वविद्यालय की प्रो. डेजी नारायण ने कहा है कि महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है वह देशविरोधी कृत्य है। यह गुंडागर्दी की हद है। गुंडातत्व पूर समाज पर कब्जा कर लेता है और सरकार व राजनेता चुप्पी साधे हैं। महाराष्ट्र की सरकार व केंद्र की यूपीए सरकार भी इसके लिए उतनी ही दोषी है। मनसे की गुंडागर्दी पर सरकार लगाम कसने में नाकाम है। राज ठाकर जैसे लोग हीरो बन जा रहे हैं। हम अपने ही देश में पीटे जाएं तो कहीं न कहीं भड़ास तो निकलती ही है लेकिन यह दुखद है कि इससे वैसे राज्य को नुकसान हो रहा है जो पहले से ही विकास के निचले पायदान पर है। एनडीए व यूपीए राजनीति करने में लगी है। यूपीए सरकार को आगे आकर बिहारी छात्रों को भरोसा दिलाना होगा। कथाकार शेखर काफी आहत हैं। वे कहते हैं कि लगता है कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है। राज ठाकर व मनसे कार्यकर्ता मनमानी कर रहे हैं। बिहारी छात्रों पर महाराष्ट्र में कहर बरपाया जा रहा है लेकिन केन्द्र की सरकार में जमे बिहारी मंत्री व सांसद चुप बैठे हैं। उन्हें सामूहिक इस्तीफा दे देना चाहिए। बिहारी अस्मिता की रक्षा होनी चाहिए। छात्रों का आंदोलन सही रास्ते जा रहा है। केवल इस आंदोलन में शामिल हो रहे गड़बड़ तत्वों पर नजर रखनी होगी।

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  • Web Title: महाराष्ट्र व बिहार की घटना से आहत हैं बुद्धिजीवी