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चन्द्रयान-1 से अपेक्षाएं

रायबरेली ही नहीं, पूरे देश की सोचें हाल ही में, अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र यू.पी. के रायबरली दौर पर अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी ने, यू.पी. की महिला दलित मुख्यमंत्री सुश्री मायावती को, अपनी एक सभा रद्द किए जाने पर ललकारते हुए कहा था, ‘कि मुझे कोई भी अपने घर जाने से नहीं रोक सकता- इसके लिए चाहे मुझे जेल ही क्यों न जाना पड़े’। सोनिया जी, आप इस देश की पुत्रवधु भी हैं साथ ही एक प्रमुख राजनैतिक दल की अध्यक्षा एवं देश की नेता भी हैं, आपको भला कौन अपने घर में जाने से रोक सकता है, किन्तु इस देश की राजधानी दिल्ली एवं देश के विभिन्न राज्यों में लाखों की संख्या में ऐसी बहुएं हैं, जिनको अपने घर में जाने से जबर्दस्ती रोक कर कई वर्षो से रखा हुआ है, ऐसी हाारों-लाखों बहनें हैं, जिनको अपने पैतृक मकानों में विवाह के बाद प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा है, हाारों-लाखों की संख्या में ऐसी वृद्धा माताएं हैं, जिनके पुत्रों ने उनकी सम्पत्ति पर कब्जा कर रखा है व उनको ही घर से बाहर निकाल रखा है। देश की जेलों में हाारों-लाखों महिलाएं निर्दोष होने के बाद भी, अदालत से दोषी बन कर नारकीय जीवन जी रही हैं। यह तो यू.पी. की मुख्यमंत्री ही हैं, जिन्होंने आपको रायबरली की यात्रा करने से नहीं रोका तथा आपकी ललकार भी शांतिपूर्वक सुनती रहीं। आप केवल रायबरली को ही सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश न समझें, आपके लिए तो यह पूरा देश ही एक रायबरली है। किशन लाल कर्दम, बी-514, जे. जे.कॉलोनी हस्तसाल रोड, उत्तम नगर, नई दिल्लीं

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