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‘नौसेना के पास बूढ़ी पनडुब्बियों का जमावड़ा’

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भारतीय नौसेना पर बूढ़ी पनडुब्बियां जमा करने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां बूढ़ी हो चली हैं और वर्ष 2012 तक बेड़े में शामिल 63 फीसदी पनडुब्बियां अपनी उम्र से आगे निकल चुकी होंगी। वर्ष 2006-07 के लिए जारी अपनी इस रिपोर्ट में सीएजी ने कहा है कि अपनी उम्र से अधिक सेवाएं प्रदान करने वाली पनडुब्बियां खतरना साबित हो सकती हैं। आलम यह है कि बेड़े की 50 फीसदी पनडुब्बियां अपनी उम्र की 75 फीसदी सेवाएं प्रदान कर चुकीं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बूढ़ी हो चली पनडुब्बियों व उनके नवीनीकरण की दीर्घकालिक प्रक्रिया के कारण बेड़े की औसत उपलब्ध क्षमता घट कर 48 प्रतिशत पर आ गई है। कैग ने पाया है कि नौसेना को सिर्फ पनडुब्बियों का बूढ़पन ही नहीं प्रभावित कर रहा है, बल्कि पनडुब्बियों का अतिशोषण भी किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षण के दौरान वाई श्रेणी की पनडुब्बियों ने अपने शोषण का संकेत दिया। प्रदर्शन के दौरान वे अपनी क्षमता को लेकर तय मनदंडों पर खरा नहीं उतर पाईं। रिपोर्ट में प्रबंधन पर सवाल खड़ा किया गया है। कहा गया है कि बेड़े को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए नई पनडुब्बियों की समय पर भर्ती और उनकी मरम्मत का कार्य जरूरी होता है। लेकिन नौसेना में इस सबका प्रबंधन काफी कमजोर है। ज्यादातर नई भर्तियां तय समय के भीतर नहीं हो पातीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण व सुधार के लिए नौसेना ने 1560 करोड़ रुपयों का जो काम अपने हाथों में लिया था, उस पर किसी अधिकृत वित्तीय प्राधिकार की मंजूरी नहीं ली गई थी।

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