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वैश्विकचच मंदी का असर नहीं पड़ेगा : सुब्बा

रिार्व बैंक की दूरदर्शिता माने या फिर अतिरिक्ित सजगता। आरबीआई बेहद सतर्क है हाल के उपायों से बाजार में एक लाख 85 हाार करोड़ रुपये झोंकने का दांव कहीं उल्टा न पड़ जाये। लिहाजा, आज जारी मौद्रिक नीति में उसने ब्याज दरों में और कमी या बाजार में और धन की उपलब्धता बढ़ाने पर उसने चुप्पी साध ली। नतीजतन रपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और बैंक दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। अलबत्ता, उसने मौजूदा आर्थिक हालातों पर बेहद चिंता जताते हुये उसने आगे की दिशा साफ कर दी। वित्तीय तंत्र के हालातों को संभालने के लिए वह निगरानी और अन्य उपाय जारी रखेगा। यही नहीं, जरूरत पड़ने पर गर-परंपरागत तौर-तरीके अपनाने से भी नहीं चूकेगा। बेहद सतर्क मौद्रिक नीति के चलते कॉरपोरट जगत मायूस हो गया वहीं पूंजी बाजार लडख़ड़ाकर धड़ाम हो गया। ऐसा जुलाई 2006 के बाद पहली बार हुआ है। वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने स्थितियों को संभालने के लिए आरबीआई की तारीफ के पुल बांधे और कहा कि सरकार संकट पूर्ण घड़ी से निपटने में सक्षम हैं। ऐसी परिस्थिति आ जाने पर लोग ऐसे उपाय देखेंगे जो इतिहास में कभी लागू नहीं हुये। आरबीआई गर्वनर डॉ.डी. सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई के उपायों का असर बैंकिं ग क्षेत्र में जल्द दिखेगा। महंगाई, आर्थिक विकास दर और वित्तीय उथल-पुथल को संभालने कर दिशा में न्यायसंगत संतुलन स्थापित करने के प्रयास जारी रहेंगे। ग्रामीणों को महाजनों के चंगुल से मुक्ित अभियान के तहत आरबीआई ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की शाखायें बढ़ाने की बात कही है। बाजार की अनिचितता से सुरक्षा के लिए आरबीआई ने अगले साल वर्ष 200ी शुरुआत में ब्याज दर वायदा सौदे शुरू करने की घोषणा की है।

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