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किशनगंज संसदीय क्षेत्र: एक नया विधानसभा क्षेत्र बना और भूगोल भी बदला

किशनगंज जिले में पहले तीन विधानसभा क्षेत्र थे, अब उनकी संख्या चार हो गई है। कोचाधामन नया विधानसभा क्षेत्र बना है। इस ससंदीय क्षेत्र में किशनगंज जिले के चार तथा पूर्णिया के दो विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। किशनगंज जिले के बहादुरगंज,ठाकुरगंज, किशनगंज,कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र में आते हैं,ाबकि अमौर और वायसी पूणिर्या जिले में। किशनगंज के पुराने संसदीय क्षेत्र से दो विधानसभा क्षेत्र- जोकीहाट और सिकटी निकल गए,ाबकि कोचाधामन और वायसी नए विधानसभा क्षेत्र जुड़ गए हैं। पहले तीन जिलों से मिलकर संसदीय क्षेत्र बना था और अब दो जिलों से ही मिलकर इस संसदीय क्षेत्र का गठन हुआ है। दिलचस्प यह है कि किशनगंज विधानसभा का किशनगंज ब्लाक कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गया है। किशनगंज संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 1163678 और मतदान केंद्रों की संख्या 808 है।ड्ढr ड्ढr राजद से तस्लीमुद्दीन का चुनाव लड़ना प्राय: तय है। 2004 के चुनाव में राजद के तस्लीमुद्दीन ने भाजपा के स्ैायद शहनवाज हुस्ैान को 1604मतों से पराजित किया। श्री तस्लीमुद्दीन को 420331 मत और श्री हुसैन को 25मत मिले। एक पूर्व सांसद की बेटी व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। आल इंडिया मिल्ली तालिमी काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना एसरारूल हक भी चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। जद यू के टिकट के लिए अनेक लोग प्रयासरत हैं। किशनगंज जिले में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी है और यह राज्य में अल्पसंख्यक राजनीति का केंद्र है। आजादी के बाद नीतीश सरकार ने इस जिले में पहली बार अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले अधिकारी डीएमव एसडीओ बनाये हैं।ड्ढr ड्ढr किशनगंज जिले में 7 ब्लाक तथा 126 पंचायतें हैं। जिले की चौहद्दी 1884 वर्ग किलोमीटर है। किशनगंज जिले की आबादी 1,2है। इसमें 412,हिन्दू तथा 876,305 मुसलमान हैं। मुसलमानों की आबादी जिले में 67.6 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति की आबादी 85,833 है। यह पिछड़ा हुआ जिला है। इस जिले की साक्षरता दर 31.02 प्रतिशत है और 84 प्रतिशत महिलाएं अशिक्षित हैं । 57.आबादी गरीबी रखा के नीचे बसती है। किशनगंज में 60.04 प्रतिशत मुस्लिम खेत मजदूर हैं। दलित ससमुदाय में खेतिहर मजदूरों की तादाद 70.00 प्रतिशत से अधिक है। जिले की प्रति व्यक्ित आय 5600 रुपए है। जिले के 65.6 प्रतिशत लोगों के पास टेलीफोन, रडियो ,साइकिल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहरी आबादी सिर्फ 6.05 प्रतिशत है।ड्ढr ड्ढr किशनगंज 1845 में ही अनुमंडल बना था। यहां की नगरपालिका 1887 ई. से ही कायम है। उन्नीसवीं सदी के आरंभ में यह एक छोटा शहर था। किशनगंज नाम रखे जाने की कथा यह है कि मुगल काल में एक संन्यासी यहां पहुंचे। मुस्लिम प्रभुत्व का पता लगते ही संन्यासी लौटने लगे। खगड़ा नवाब ने उन्हें जाने से रोका और आलमगंज के एक हिस्सा का नाम कृष्णकुां रख दिया। 1857 की लड़ाई के समय किशनगंज हलचल के केंद्र में रहा। 1और 1में महात्मा गांधी ने किशनगंज का दौरा किया था। 1े भारत छोड़ो आंदोलन में इस जिले के लोग शिद्दत के साथ सक्रिय थे। 1में चीन और 1ी बंगलादेश लड़ाई के समय किशनगंज भारतीय फ ौज का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। 14 नवम्बर 10 को किशनगंज जिला बना।ड्ढr ड्ढr आजादी के पहले उत्तर भागलपुर सदर सह किशनगंज विधानसभा क्षेत्र से 1में शिवधारी सिन्हा जीते थे। 1में फणी गोपाल सेन,1में कांग्रेस के मो. ताहिर चुने गए थे। 1में लखन लाल कपूर, 1में जमीलुर रहमान, 1में हलीमुद्दीन , 10-84 में जमीलुर रहमान, 1में एम.जे.अकबर, 1में सैयद शहाबुद्दीन, 1004 में तस्लीमुद्दीन,1में सैयद शहनवाज हुसैन चुने गए।

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