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कोल्ड ड्रिंक्स दुकानदार काट रहे जेब हौले-हौले

पैसा बचाना हो तो गरम पेय पदार्थ का इस्तेमाल करं। शीतल पेय पदार्थ पीने पर आपकी जेब कट सकती है। जी हां! राजधानी सहित झारखंड के तमाम शहरों में आपके साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। शीतल पेय पदार्थ पीने पर आपको एमआरपी से दो से सात रुपये अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जिसका अंदाजा शायद आपको नहीं है। इस व्यवसाय से जुड़े खुदरा दुकानदार शीतल पेय उत्पादों की बिक्री पर बचत नहीं होने तथा उसे ठंडा करने में बिजली पर होनेवाले खर्च का रोना रोकर प्रत्येक उत्पाद पर 43 से 45 प्रतिशत मुनाफा कमाते हैं। उन्हें थोक दर पर जो उत्पाद मिलता है, यदि वे उसे एमआरपी पर बेचें तो भी उन्हें कम से कम सात रुपये के उत्पाद पर एक रुपये का मुनाफा होगा। फिर भी वे एमआरपी से दो से सात रुपये अधिक कीमत पर उत्पादों को बेचते हैं। वैसे ग्राहक जो इस वास्तविकता को जानते हैं तथा इसका विरोध करते हैं, उन्हें दुकानदार से एक ही जवाब मिलता है-लेना है तो लीजिए नहीं तो मत लीजिए। इस सवाल पर कभी-कभी दुकानदार और ग्राहक के बीच नोंकझोंक की नौबत भी आ जाती है। मंहगाई के इस दौर में उपभोक्ताओं की खुलेआम जेब कट रही है, लेकिन इसे देखनेवाला कोई नहीं है। बाजार दर पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नियंत्रण करनेवाले अधिकारी लेन-देन कर चुप्पी साधे रहते हैं। आखिर उपभोक्ता करं तो क्या। उनकी परशानी को देखनेवाला कोई नहीं है। खुदरा व्यावसायी ग्राहकों से किस प्रकार एमआरपी से अधिक कीमत वसूलते हैं इसका अंदाजा इस आंकड़े से लगाया जा सकता है।

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  • Web Title: कोल्ड ड्रिंक्स दुकानदार काट रहे जेब हौले-हौले