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जमीन रख लोन ले सकते हैं आदिवासी

झारखंड के आदिवासी अब जमीन गिरवी रख कर हाउसिंग एवं एजुकेशन लोन ले सकते हैं। सरकार के उस आदेश को हाइकोर्ट ने निरस्त कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि एसटी अपनी जमीन गिरवी रख कर लोन नहीं ले सकते। कोर्ट ने इस आदेश को संविधान एवं सीएनटी एक्ट के खिलाफ बताया है। जस्टिस एमवाइ इकबाल एवं जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि झारखंड के आदिवासी अभी भी झोपड़ियों में रहते हैं। यदि इन्हें लोन नहीं मिला, तो इनकी हालत में सुधार नहीं होगा। इस संबंध में फेलिक्स तांबा ने जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने अपने 1पेज के आदेश में कहा है कि एससी-एसटी को लोन लेकर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान करने का अधिकार है। बैंक द्वारा इसके लिए लोन दिया जाता है। विदेश जाने के लिए भी बैंक लोन देते हैं। इस कारण यह सुविधा एससी- एसटी को भी मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट के सेक्शन 46 में भी इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है कि आदिवासी जमीन गिरवी रख हाउसिंग एवं एजुकेशन लोन नहीं ले सकते। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने हाइकोर्ट के पूर्व में दिये गये जिस आदेश के आलोक में लोन देने पर रोक लगाने की बात कही है, उस आदेश में भी ऐसा कुछ नहीं है जिससे सरकार को जमीन गिरवी रख लोन देने पर रोक लगानी पड़ी। इस जनहित याचिका में कहा गया था कि आदिवासियों को जमीन गिरवी रख लोन नहीं दिये जाने से उन्हें काफी परशानी हो रही है। सरकार के आदेश के बाद बैंकों से उन्हें लोन नहीं मिल रहा है। इस कारण वह घर नहीं बना पा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। अदालत से सरकार का आदेश निरस्त करने का आग्रह किया गया था। प्रार्थी की ओर से वकील मनोज टंडन एवं शिवशंकर कुमार ने बहस की।ड्ढr राज पर सुनवाई अब 14 को रांची। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकर की याचिका पर हाइकोर्ट में अब 14 नवंबर को सुनवाई होगी। यह मामला सुनवाई के लिए जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट में सूचीबद्ध था, लेकिन काफी नीचे था। ठाकर के वकील वाइबी गिरी ने कोर्ट से इस मामले की पहले सुनवाई करने का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। ठाकर ने जमशेदपुर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। ठाकर ने निचली अदालत में आवेदन देकर कहा था कि यह मामला जमशेदपुर न्यायालय के क्षेत्राधिकार में नहीं है। इस कारण इसे यहां स्थानांतरित कर देना चाहिए। साथ ही अदालत से ठाकर ने सशरीर हाजिर होने के मामले से छूट देने का भी आग्रह किया था।

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