DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चीन के साथ कई मुद्दों पर अहम बातचीत

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को यथाशीघ्र सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीन के राष्ट्रपति हू जिंताआे ने अपने-अपने विशेष प्रतिनिधियों को वार्ता में तेजी लाने को कहा है। डॉ. सिंह और हू के बीच एशिया-यूरोप बैठक (एसिम) के दौरान शनिवार शाम अलग से हुई द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद के अंतिम समाधान से पहले सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों नेताआें के बीच ‘ग्रेट हाल आफ चाइना’ में लगभग 50 मिनट तक चली बैठक काफी मैत्रीपूर्ण माहौल में हुई। डॉ. सिंह ने दोनों देशों के बीच बहने वाली नदियों के मुद्दे पर द्विपक्षीय सहयोग की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने इस संबंध में वर्ष 2007 में गठित विशेषज्ञ स्तर की व्यवस्था के कामकाज पर संतोष जताते हुए कहा कि दोनों देशों के विशेषज्ञ भविष्य में और अधिक प्रगति कर सकते हैं। विशेषज्ञों की तीसरी बैठक अगले वर्ष होगी। बैठक में वैश्विक वित्तीय संकट पर चर्चा करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश द्वारा आगामी 15 नवंबर को वाशिंगटन में बुलाई गई शिखर बैठक पर भी चर्चा हुई। दोनों नेता इस बात पर एकमत थे कि बैठक के लिए उचित तैयारी की जानी चाहिए, ताकि इसके नतीजे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में विश्वास भर सकें। प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. सिंह ने चीनी राष्ट्रपति को बताया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। इसे स्थिर करने के लिए विकसित देशों को और कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए उभरते और विकासशील देशों की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों नेताआें ने इस मुद्दे पर भविष्य में संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। हू ने भारत के महत्वाकांक्षी चंद्र अभियान ‘चंद्रयान प्रथम’ के सफल प्रक्षेपण पर डॉ. सिंह को बधाई दी। डॉ. सिंह ने भारत लौटते हुए अपने विशेष विमान में संवाददाताआें से बातचीत में कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2010 तक 60 अरब डॉलर का निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने कहा कि मैंने हू के साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के मुद्दे पर भी चर्चा की। हम दोनों इस बात पर एकमत थे कि इस संकट के बारे में भारत और चीन को संपर्क में रहना चाहिए तथा इससे पैदा हुई समस्याआें का व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए समान राय रखने देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। दोनों नेताआें के बीच इस वर्ष यह तीसरी बैठक थी। एसिम बैठक के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि भारत ने शिखर स्तर पर पहली बार इस बैठक में शिरकत की, लेकिन उसकी बात सुनने के लिए सभी बड़े बेताब थे। चाहे वह वैश्विक वित्तीय संकट हो या सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य अथवा सतत विकास का मुद्दा भारतीय दृष्टिकोण पर काफी ध्यान दिया गया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: चीन के साथ कई मुद्दों पर अहम बातचीत