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अंतरराष्ट्रीय व्यापार करों में सुधार की जरूरत: फिक्की

वाणिय और उद्योग परिसंघ (फिक्की) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को सरल और सुगम बनाने तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विलय और अधिग्रहण की प्रक्रिया को सहज बनाने के लिए देश की कर व्यवस्था में सुधार जरूरी है। फिक्की का कहना है कि भारत ने कर सुधार के लिए बहुत उपाय किए हैं लेकिन अब तक इनमें से कई नियम जस के तस पड़े हैं और उन्हें क्रियान्वित नहीं किया गया है और साथ ही अब अंतरराष्ट्रीय कर जैसे कई नए मुद्दे भी आ रहे हैं जिन पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। फिक्की की रविवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार देश के आर्थिक और सामाजिक आधार में सुधार के नजरिए से भी इस कर ढ़ांचे में बदलाव जरूरी है। इस अध्ययन रिपोर्ट को 5 और 6 अक्टूबर को यहां कर संबंधी विषय पर दो दिन तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पस्तुत किया जाएगा। परिसंघ का कहना है कि भारत में कर और नियामक की व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ व्यवस्थाआें में से है और कई देशों की तुलना में तो यह बहुत ही अच्छी है। इसमें विलय और अधिग्रहण जैसे मुद्दों को विशेष महत्व दिया गया है। फिर भी बेहतर लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा और विलय व अधिग्रहण के माहौल को और आसान बनाने में काफी समय लगेगा। फिक्की के अध्ययन के अनुसार इससे में सबसे बडा एक मुद्दा यह है कि कंपनी अधिनियम 1े तहत क्या किसी भारतीय कंपनी का विदेशी कंपनी में विलय पर विचार किया जा सकता है। इस अधिनियम के कुछ प्रावधानों को देखने से पता चलता है कि विदेशी कंपनी का भारतीय कंपनी में विलय तो आसान है लेकिन किसी भारतीय कंपनी के विदेशी कंपनी में विलय के बारे में कानून में कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास के परिदृश्य में किसी भारतीय कंपनी का विदेशी कंपनी के साथ किया जाने वाला विलय वैधानिक और मान्य होना चाहिए इसी प्रकार यदि कोई भारतीय कंपनी विदेश में पैसा लगाती है उस कंपनी का पूंजीगत लाभ पर लगने वाला कर भारत में ही लगना चाहिए। उस कंपनी को वहां जो लाभ होता उसे वह बदले ब्याज (रायल्टी) सेवा अथवा प्रबंधन शुल्क तथा पूंजीगत लाभ के रूप में स्वदेश स्थित होल्डिंग कंपनी को भेज सकती है। परिसंघ का कहना है कि बदली वैश्विक परिस्थितियों में भारतीय कारोबारी विदेशों में बड़ी तादात में अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं और अच्छा खास लाभ अर्जित कर रही है। फिक्की का कहना है बदली परिस्थितियों में कारोबारियों के हितों के लिए कर व्यवस्था में सुधार किया जाना चाहिए। भारत में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए करों का मामला महत्वपूर्ण है। इस मामले में स्पष्टता जरूरी है और इसमें सुधार से ही आर्थिक विकास का रास्ता तेजी से तय किया जा सकता है।

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  • Web Title: ‘अंतरराष्ट्रीय व्यापार करों में सुधार की जरूरत’