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रिवर्स स्विंग में महारत को बेताब ऑस्ट्रेलियाई

रिवर्स स्विंग की दहशत ऑस्ट्रेलिया टीम में बुरी तरह से छाई हुई है। उसके बल्लेबाज जहीर खान और इशांत शर्मा की रिवर्स स्विंग के जाल में खूब फंसे। इसलिए कंगारुओं ने यह रणनीति बनाई है कि कोटला टेस्ट में भारतीय बल्लेबाजों को भी रिवर्स स्विंग से फंसाया जाए। क्योंकि पुरानी गेंद का इस्तेमाल करने लायक स्पिन आक्रमण उनके पास है नहीं। नई गेंद की चमक विरन्द सहवाग और गौतम गंभीर की जोड़ी पर कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पा रही है। रविवार को फिरोशाह कोटला मैदान मे अभ्यास के दौरान ऑस्ट्रेलिया के सभी तेज गेंदबाज रिवर्स स्विंग कराने की कोशिश में जुटे रहे। रिवर्स स्विंग के गुर सीखने के लिए ही उन्होंने मोहाली से दिल्ली पहुंचने से पहले ही भारत के पूर्व टेस्ट तेज गेंदबाज रिवर्स स्विंग के मास्टर मनोज प्रभाकर की मदद चाही थी, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। ऐसे में उनके पास खुद ही मेहनत करने के अलावा कोई चारा नहीं था। वहीं भारतीय बल्लेबाज भी रिवर्स स्विंग खेलने पर खासा जोर देते मिले। सचिन तेंदुलकर ने तो गेंद के एक तरफ काली टेप बांधी और इशांत शर्मा को आधी पिच से गेंदें फेंके खासा अभ्यास कराया। वहीं कोच गैरी कर्स्टन टेनिस बॉल और रैकेट से सर्विस करते हुए इशांत को बाउंसर खेलने का अभ्यास करात रहे। प्रभाकर की सेवाएं पाने में असफल ऑस्ट्रेलियाई खेमे ने अपने स्पिनरों आफ स्पिनर जेसन क्रेाा और लेग स्पिनर कैमरुन व्हाइट को भारतीय पिचों पर मेजबान बल्लेबाजों को छकाने के गुर सिखाने के लिए उस शख्स से संपर्क किया जो वर्षो से भारत दौर पर आने वाली विदेशी टीमों के स्पिन गेंदबाजों को गुर सिखाता आया है। ऑस्ट्रेलियाई टीम के पारंपरिक दोस्त बिशन सिंह बेदी सुबह नेट अभ्यास के दौरान ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की ग्रिप और गेंद फेंकने के तरीके को सुधारने में व्यस्त रहे। बेदी के विपक्षी खेमे में होने पर किसी को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। क्योंकि यह पहला मौका नहीं था कि बेदी विरोधियों की मदद करते दिखाई दे रहे थे। भारतीय टीम भी इस मामले में बेदी से नाराज नहीं है। वह दोपहर को अभ्यास के लिएआई और उन्होंने बेदी को नेट पर ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का गुर सिखाते नहीं देखा, लेकिन कोटला पहुंचने से पहले ही उन्हें इसकी जानकारी मिल चुकी थी। शाम को इस मुद्दे पर राहुल द्रविड़ ने पूरी खेल भावना दिखाते हुए कहा, मुझे इसमें कुछ गलत नजर नहीं आता। क्रिकेट एक ग्लोबल गेम है और इससे जुड़े सभी लोग अपने ज्ञान को एक-दूसर से बांटते हैं। सभी को इसकी छूट मिलनी भी चाहिए। आखिर हम भी जब विदेश जाते हैं तो हम उस देश के पूर्व खिलाड़ियों से बातचीत करते हैं और वे भी हमें बारीकियों के बार में बताते हैं। आईपीएल और काउंटी क्रिकेट के दौरान अलग-अलग देशों के खिलाड़ी आपस में बहुत ज्यादा विचारों का अदान-प्रदान करते हैं। मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता। इस बार में जब हिन्दुस्तान ने मनोज प्रभाकर की प्रतिक्रिया लेनी चाही तो उन्होंने साफ तौर पर कहा, यह तो अब पुरानी बात हो गई। लेकिन यह बताने पर कि, आज बिशन सिंह बेदी ऑस्ट्रेलियाई टीम को गुरु सिखाने आए थे। प्रभाकर ने कहा, मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, कुछ बोलूंगा तो बात पता नहीं कहां तक पहुंच जाएगी। इस पर जब उन्हें बताया गया कि, राहुल द्रविड़ ने कहा है कि, बेदी के विपक्षी टीम को सिखाने पर भारतीय टीम को कोई आपत्ति नहीं है। प्रभाकर ने कहा, यह उनक समझ है। राहुल ऐसा इसलिए कह सकते हैं कि वे एक ग्रेट बल्लेबाज हैं। हर कोई ऐसा नहीं कह सकता।ं

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  • Web Title: रिवर्स स्विंग में महारत को बेताब ऑस्ट्रेलियाई