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पंचायत का फरमान, लड़की के बदले लड़की

लगता है रतनाहेड़ी गांव भारत से 300 साल पीछे चल रहा है। सौ साल पीछे इसलिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि तब अंग्रेजों का राज था और उसमें भी कानून-व्यवस्था नाम की चीज थी। देवबंद की रतनाहेड़ी ग्राम पंचायत ने अभी चंद दिनों पहले ऐसा फैसला सुनाया कि सुनने वालों के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई और महसूस हुआ कि कानून और लोकतंत्र जसी चीज फिलहाल यहां नहीं पहुंची है। दो अलग-अलग गांवों के युवक-युवती प्रेम के बंधन में बंध गए। उन्हें लगा कि यहां उनका प्यार परवान नहीं चढ़ पाएगा तो गुपचुप गांव छोड़कर चले गए। इधर लड़की के घरवालों की पहल पर बैठी पंचायत ने फैसला सुनाया कि लड़के वालों के घर की एक लड़की को लड़के वालों के घर जाना होगा। अब लड़के वालों ने पंचायत के फैसल के खिलाफ पुलिस की शरण ली है। सिलसिलेवार बयां करं तो रतनाहेड़ी निवासी एक युवती के निकट के गांव बहेड़ा निवासी एक युवक से प्रेम-संबंध हो गए। इसके बाद दोनों घर से भाग गए। युवती के पिता ने थाने में तहरीर दी। इसपर युवक पक्ष ने 25 अक्तूबर तक लड़की को खोजने का आश्वासन दिया, लेकिन लड़की न मिल सकी। इसके बाद लड़की वालों ने पंचों के आगे न्याय की गुहार लगाई। शनिवार शाम करीब चार बजे रतनाहेड़ी में दोनों पक्षों की पंचायत हुई। पंचायत में छह गांव के लोग शामिल हुए। छह घंटे तक चली पंचायत में पहले तो युवक के पिता को दो दिन के भीतर युवती की बरामदगी का आदेश दिया गया, लेकिन जब उसने युवक और युवती की जानकारी होने से इंकार किया तो पंचायत ने उसे भी बराबर का दोषी ठहरा दिया। पंचायत ने फैसले सुनाया कि युवक पक्ष पूरी तरह से युवती को भगाने का आरोपी है। इसलिए युवक के परिवार की एक लड़की युवती पक्ष के परिानों को सौंप दी जाए। थानाध्यक्ष होशियार सिंह और ग्राम प्रधान बुद्धू सिंह ने बताया कि लड़की के बदले लड़की देने के फैसले की उन्हें भी जानकारी है। थानाध्यक्ष का कहना है कि युवती के गायब होने के मामले में यदि किसी को कोई आपत्ति है तो उसे कानून की सहायता लेनी चाहिए। क्या यह तुगलकी फरमान सुनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी? पुलिस और ग्राम प्रधान दोनों इस बात पर चुप्पी साध गए।

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