DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अपव्यय का अनर्थ

अनर्थ अपनाने को दुष्टता कहते हैं। उससे कुछ ही हल्के दज्रे का पाप है- व्यर्थ में शक्ितयों को गंवाते रहने की मूर्खता। देखने में यह कोई बहुत बड़ी बुराई नहीं लगती पर हानि इसमें भी लगभग उतनी ही जा पहुंचती है, जितनी अनर्थमूलक दुष्टता से होती है। शारीरिक श्रम-शक्ित को व्यर्थ में गंवाना ‘आलस्य’, मन को अभीष्ट प्रयोजनों में न लगाकर इधर-उधर भटकने देना, ‘प्रमाद’, समय का, वस्तुओं का, धन का, क्षमता का बेसिलसिले उपयोग करना, उन्हें बर्बाद करना, ‘अपव्यय’ तथा तत्परता, जागरूकता, साहसिकता, उत्साह का अभाव-अन्यमनस्क मन से बेगार भुगतने की तरह कुछ उल्टा-पुल्टा करते रहना- ‘अवसाद’। इन चार दुगरुणों की चतुरंगिणी जिस पर भी आक्रमण करती है, वह जीवित मृतक जसी स्थिति में जा पहुंचता है। उसके द्वारा कुछ पुरुषार्थ बन ही नहीं पड़ता। जो थोड़ा बहुत काम होता है, वह भी अस्त-व्यस्त। इन चारों में से जहां एक होगा, वहां क्रमश: दूसर साथी भी घुसते चले जाएंगे। पक्षाघात पीड़ित, अपंग, असहाय की तरह वह अपने लिए और दूसरों के लिए भारत समान रहेगा। इन दुर्गुणों के निवारण, निराकरण के लिए भी वैसा ही प्रबल प्रयत्न करना चाहिए जसा कि अवांछनीयताओं, अनैतिकताओं, असामाजिकताओं के विरुद्ध संघर्ष करना आवश्यक माना गया है। बौद्धिक क्रांति, नैतिक क्रांति एवं सामाजिक क्रांति के लिए प्रयत्नशील रहना पड़ता है। जसे मूढ़ मान्यताएं, अनैतिकताएं तथा सामाजिक भ्रष्टताएं हम नहीं सह सकते हैं, वैसे ही आलस्य, प्रमाद, अपव्यय एवं अवसाद को सहना नहीं चाहिए। श्रमनिष्ठा, कर्म-परायणता, उत्साह, स्फूर्ति, सजगता, व्यवस्था, स्वच्छता हमार अपने स्वभाव के अंग होने चाहिए। भीरूता, आत्महीनता, दीनता, निराशा, चिंता जसी मनुष्यता को लज्जित करने वाली एक भी दुष्प्रवृत्ति अपने में रहने न पाए ऐसी सावधानी हमेशा रखें। आप कितना श्रम करते हैं और कितना अर्जन करते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। दरअसल, आपने समाज को क्या दिया, परिवार के लिए क्या किया या देश, संस्कृति, मानवता के नाम कितना लुटाया, यही आपकी उपलब्धि कहलाती है। धन, ज्ञान व चरित्र से आप महान तब कहें जाएंगे जब उन्हें पात्र देख कर खर्च करंगे। जो व्यक्ित अपने सामथ्र्य के अनुरूप अपने उपादानों को कल्याण में लगाता है, वह ही समाजसेवी, देशभक्त और महामानव बन जाता हे। इसके लिए अपनी शक्ित को उचित स्थान पर खर्च करने की आदत डालनी होगी और व्यर्थ के अपव्यय से खुद को बचाना होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: अपव्यय का अनर्थ