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प्रदोष काल में करं लक्ष्मी पूजन

ार्तिक कृष्णपक्ष 28 अक्तूबर मंगलवार को दीपावली पर्व मनाया जायेगा। इसी दिन स्नान दान और श्राद्ध की भौमवती अमावस्या भी होगी। प्रदोषकाल में लक्ष्मी-गणेश, इंद्र और कुबेर के पूजन का विशेष प्रयोजन है। दीपावली पूजन सायं 6.1से रात्रि 8.15 तक स्थिर वृष लग्न मुहूर्त में होगा। यह समय गृहस्थों के पूजन के लिए उपयुक्त काल है। इसके अतिरिक्त रात्रि 12.48 से भोर में 3.03 बजे तक स्थिर सिंह लग्न में है। यह मुहूर्त बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और तांत्रिक उपासना के लिए उपयुक्त है। अमावस्या का दिन तांत्रिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन प्रात:काल तैलस्नान करके अलक्ष्मी को दूर करने के लिए लक्ष्मी की पूजा की जाती है। व्यापारी लोग अपनी बही-खातों की पूजा भी इसी दिन करते हैं। लक्ष्मी पूजा की रात्रि को सुखरात्रि कहते हैं। इस दिन लक्ष्मी पूजा के साथ कुबेर पूजा की जाती है।ड्ढr कार्तिकी अमावस्या की अर्धरात्रि को भगवती लक्ष्मी सभी गृहस्थों के घरों में विचरण को आती है। अपने हित साधन के लिए लोगों को इंद्र, कुबेर श्रीलक्ष्मी पूजनम् करिष्यते। दिवस र्पयत व्रत रखने के बाद सायंकाल स्नान करके अक्षत से अष्टदल निर्मित करके लक्ष्म्यै नम:, इंद्राय नम:, कुबेराय नम: का पाठ करके षोडाषोपचार पूजन करं। भगवती के पूजन के उपरांत सामथ्र्य के अनुसार विषम संख्या में श्रीसूक्त का पाठ करने से सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।ड्ढr आदि शंकराचार्य द्वारा निर्मित कनकधारा महामंत्र -अगम हर पुलक भूषण मां श्रेयंती.. से मां लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी होता है। रक्त कमल फूलों से अलंकृत कर मां की पूजा श्रद्धाभाव से करं।ं

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