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संकट पर वित्त मंत्रालय हुआ सक्रिय

वैश्विक वित्तीय संकट के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था के भारी दबाव में होने और कई उपायों के बेअसर साबित होने पर खुद प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के चिंता जाहिर करने के बाद वित्त मंत्रालय कुछ नये कदम उठाने की जद्दोहद में जुट गया है। इस बार में वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने देश के प्रमुख नीति निर्धारकों के साथ आज व्यापक विचार विमर्श किया। काफी देर चली इस बैठक के दौरान पूंजी बाजार की मौजूदा हालत और आने वाले दिनों में बैंकिंग व्यवस्था और औद्योगिक मंदी से निपटने को लेकर नये रणनीतिक कदमों पर मशविरा किया गया। वहीं पहले से चली आ रही आशंकओंे के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रटिंग एजेंसी मूडीा ने एशियाई प्रशांत क्षेत्र की वित्तीय हालात पर रड अलर्ट जारी कर सरकार को और भी सकते में डाल दिया है। मूडीा के मुताबिक समूचा एशियाई प्रशांत क्षेत्र गहर वित्तीय जोखिम के दौर में है और मंदी का भारी खतरा है। यही नहीं, उसके निर्यात लडख़ड़ाने की आशंका सर्वाधिक है। बाजार में धन की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर सरकार ने बुधवार को फिर सकारात्मक संदेश दिये। सरकार की ओर से बैकों को पूंजी पर्याप्तता अनुपात बढ़ाने के उपायों की घोषणा के बाद आज रिार्व बैंक ने गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनियों का पूंजी आधार बढ़ाने और उन्हें मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल की है। उनके लिए अपना पूंजी आधार बढ़ाने के प्रावधानों को लचीला बना दिया गया है। वैसे, वित्त मंत्रालय की बैठक के बाद किसी फैसले की ठोस घोषणा नहीं की गई। अलबत्ता, देश के शीर्ष अर्थविदों और नीति निर्धारकों के किसी मसले पर एक साथ इसजमावड़े का नीतिगत स्तर पर असर जल्द दिखने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बैठक के दौरान अगले माह अमेरिका में होने जा रही जी 20 समूह की बैठक के एजेंडे पर भी विचार विमर्श हुआ है। बैठक में उनके अलावा आरबीआई गर्वनर डॉ.डी.सुबबाराव, उप गर्वनर राकेश मोहन, योजना आयोग के चैयरमैन मोंटेक सिंह अहलूवालिया, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष सी.रंगराजन, 13वें वित्त आयोग के चेयरमैन विजय केलकर, पूर्व रिार्व बैंक गवर्नर बिमल जालान, वित्त सचिव अरुण रामनाथन, इकोनॉमिक अफेयर्स सचिव अशोक चावला और सेबी चेयरमैन सी.बी. भावे आदि मौजूद थे। बाद में रंगराजन ने संवाददाताओं से बात करते हुये अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हालातों और विकासशील देशों पर पड़ रहे उसके प्रभावों की चर्चा की। साथ ही उन्होंने आगामी 15 नवंबर को वाशिंगटन में होने वाले शिखर सम्मेलन में भारत की ओर से उठाये जाने वाले मुद्दों का भी संकेत दिया। उन्होंने बताया कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान जी 20 विकसित और विकासशील देशों के वित्तीय संकट को हल करने की दिशा में विचार विमर्श करगा। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने वैश्विक संकट को दूर करने के लिए साझी रणनीति बनाने के लिए जी 20 की बैठक बुलाई है। इसमें भारत के अलावा आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस और यूनाइटेड किंगडम के अलावा यूरोपीय संघ शामिल होंगे।

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