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दो टूक

लॉटरी एक प्रकार की द्यूत क्रीड़ा है, जिससे सभ्य समाज बचता रहा है। इसके शगल ने कई परिवार तबाह कर दिये हैं। पहले राज्य प्रश्रय से लॉटरी का धंधा चलता था, जिससे राजस्व का लाभ होता था। पर इसके कुपरिणामों की समीक्षा कर लॉटरियां बैन कर दी गयीं। अब झारखंड में इस व्यसन में लिप्त होने की छूट लोगों को मिल जायेगी। सरकार ने राज्य में लॉटरी की प्रैक्िटस की अनुमति दे दी है, बगैर राजस्व लाभ के। चौंकिए मत, यह बिलकुल सच है। मतिहीनता से ग्रस्त ऐसे आदेशों के परिपालन में झारखंड हमेशा अव्वल रहा है। जिस राज्य में आदिम जनजाति भूख और कुपोषण से मर रही है, उसपर पूरा फोकस करने के बजाय कर्महीन धनार्जन की इस परिपाटी के दर्शन झारखंड में ही सुलभ हो सकते हैं।

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