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मंदी के इस आलम में दुनिया बिना मोल की

मौजूदा आर्थिक संकट के केन्द्र में एक ऐसा सवाल छुपा है, जिसका सही जवाब पाने की उम्मीद हम बाजार से करते आए हैं। सवाल यह है, कि आने वाले वक्त में चीजों का असली मोल कैसे आंका जाएगा? एडम स्मिथ के अनुसार मूल्य मापने या तय करने की कोई आदर्श कसौटी नहीं होती वह तो बाजार के मोलभाव और माल की आवाजाही से ही तय होता है। लेकिन आज जब देशों के बाजार खुद एक के बाद एक अपने छटपटाते बैंकों, यंत्रणा से ऐंठते स्टॉक मार्केटों, पथराती र्काराशि से रहन रखी संपत्ति, सिक्योरिटी, मुद्रा और संपत्ति के सही आकलन में असफल हों, तो आप कितना ही चाहें, किसी भी तरह की संपत्ति की सही कीमत सिर्फ भावताव से आंकना असंभव हो गया है। आइसलैण्ड का ही मामला लें, जिनकी मुद्रा क्रोनूर फिलवक्त मरणासन्न है। पिछले वर्ष के दौरान राष्ट्रीय बैंकिंग व्यवस्था के ठप्प हो जाने से डॉलर के मुकाबले क्रोनूर की कीमत में पचास फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। राजधानी रक्याविक के एक बड़े घड़ी विक्रेता ने न्यूयार्क टाइम्स के संवाददाता को बताया कि अब आइसलैण्ड निवासी बैंकों तथा शेयर बाजार से निराश होकर निवेश की बतौर रोलैक्स जसी कीमती घड़ियां खरीदने लगे हैं। ‘लोग चाहते हैं कि वे जतन से बचाया अपना पैसा अगर खर्च करं भी, तो किसी ऐसी वस्तु पर जिसे गाढ़े वक्त में देस-परदेस में बेच कर चार पैसे हाथ में आ जाएं।’ उनकी राय में फ्लोरिडा में खरीदी एक कोठी की तुलना में रोलैक्स घड़ी की कीमत अधिक स्थिर प्रमाणित होगी। हाल में जब पूंजी की दुनिया उफान पर थी, तो राज्य में रिएल एस्टेट की कीमतों में जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया, आज वे ही कीमतें धूल में लोट रही हैं। एक एजेंट के अनुसार फ्लोरिडा के पॉश फोर्ट लॉडरडेल इलाके में सात लाख तीस हाार डालर कीमत की प्रॉपर्टी का दाम आज सिर्फ चार लाख डालर रह गया है। रॉकेट का ईंधन चुक गया, अब तो गिरावट ही गिरावट है, रिएल्टी एजेंट कह रहे हैं। पर बाजार की गिरावट में ऐसे बुलबुलों का फूटना ही इकलौता कारक तत्व नहीं होता। कई बार नई तकनीकी भी यह काम करती है। रिकॉर्डिग उद्योग में डिािटल युग के आने के बाद यही पाया गया। ऑनलाइन संगीत जब कुछ सेंट या एक डॉलर में उपलब्ध हो, तो कीमती डिस्क कौन खरीदे? सो संगीत की कीमत भले न घटी हो, पर रिकॉर्डिग की कीमत में भारी गिरावट आ ही गई। अब जाकर अमेरिकी फेडरल जजों के एक पैनल ने संगीत डाउनलोड करने की दरों को तय किया है। संगीत उद्योग की मांग थी कि यह दरं पुरानी शैली की रिकॉर्डिग दरों से ऊंची रखी जाएं, जबकि ऑनलाइन रिटेलर्स चाहते थे कि पुरानी व्यवस्था खत्म करके कुल आय का एक प्रतिशत कलाकार की रॉयल्टी के रूप में तय कर दिया जाए। जजों ने परस्पर विरोधी दबावों के बीच से रास्ता निकाल कर संगीत के हर ट्रैक की दर सेंट तय की, जो (पुराने) सीडी के समतुल्य है। यानी संगीत की इन दरों का अंतिम निर्धारण जजों के अनुभव के आधार पर किया गया। अंतरराष्ट्रीय निवेश में भी अक्सर निजी अवधारणा का दबाव काम करता है। अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था व स्टॉक की उठापटक के बावजूद अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, सो इसी वजह से कि लोग समझ नहीं पा रहे कि पूंजी अमेरिका में नहीं तो और कहां लगाएं? आखिर कोई कितनी रोलैक्स घड़ियां खरीदेगा?ं

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  • Web Title: मंदी के इस आलम में दुनिया बिना मोल की