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केंद्र पर जमकर बरसे आडवाणी

राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन न शनिवार को कई लोकलुभावन घोषणाओं के साथ सोनीपत स चुनावी अभियान का श्रीगणश किया। गठबंधन ने एलान किया कि सत्ता में आने पर किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज की दर पर र्का दिया जाएगा और छठ वतन आयोग मं सैनिकों व सुरक्षा बलों क साथ हुए अन्याय को समाप्त कर इंसाफ किया जाएगा। धान की कीमत 1100 रुपए प्रति क्िवंटल की जाएगी। कृषि आमदनी योजना लागू करन का भी वादा किया गया, जिसक प्रीमियम का 75 फीसदी कन्द्र सरकार भरेगी। पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला क नेतृत्व वाल इंडियन नशनल लोकदल और भाजपा क बीच हाल ही मं हुए समझौत क बाद राजग का हरियाणा मं यह पहला आयोजन था, जिस विजय संकल्प रैली का नाम दिया गया। इसमं चौटाला क अलावा प्रधानमंत्री पद क दावदार लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा क राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी, पंजाब क मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, जनता दल (यू) क अध्यक्ष शरद यादव, किसान नता शरद जोशी और भाजपा क सांसद किशन सिंह सांगवान मौजूद थ। बिहार क मुख्य मन्त्री नीतीश कुमार, उड़ीसा क मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और शिव सना सुप्रीमो बाल ठाकरे क बेटे उद्धव ठाकरे क नामों का प्रचार किया गया था लकिन यह लोग नहीं आए। आडवाणी और राजनाथ सिंह न आतंकवाद, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए सरकार की जम कर खिंचाई की। राजनाथ सिंह का कहना था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता लकिन कांग्रस न उस इस्लाम स जोड़ कर मुस्लिम आतंकवाद की पहचान दी है। अब वह मुस्लिम तुष्टिकरण की अपनी नीति क तहत वोटों के लिए आतंकवादियों क खिलाफ कार्रवाई करन स बच रही है। उन्होंन कहा कि आतंकी कार्रवाई करक भाग जात हैं और पकड़ मं नहीं आत। यदि पकड़ भी जाएं तो उनक खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उल्ट उनस लोहा लन वाल सुरक्षा कर्मियों पर ही सवाल उठाए जात हैं। उन्होंन कहा कि एसा नहीं है कि हमारी सरकार क समय आतंकवादी हमल नहीं हुए, लकिन हमन उन्हें जमकर जवाब दिया। आडवाणी न लोकसभा चुनाव फरवरी मं कराए जान की संभावना जतात हुए कहा कि एक ओर संप्रग क साढ़ चार साल क शासनकाल मं दो लाख किसानों न आत्महत्याएं की हैं, जबकि राजग क छह साल मं न तो किसानों की आत्महत्याएं हुईं और न ही महंगाई बढ़ी। हालांकि उस समय भी अन्तरराष्ट्रीय बाजार मं कई बार पेट्रोलियम पदार्थो क दाम बढ़ और पोखरण विस्फोट क बाद अमरिका न भारत की आर्थिक नाकबंदी भी की थी। ओमप्रकाश चौटाला न यूपीए सरकार को आड़ हाथों लत हुए कहा कि आज देश को चलाने वाले तीन अर्थशास्त्रियों डॉ. मनमोहन सिंह, पी. चिदम्बरम और मोन्टक सिंह आहलूवालिया को किसानों स कोई सरोकार नहीं है। किसान आत्महत्या करें, जिन्दा रहे या मर जाएं उनकी सहत पर कोई असर नहीं पड़ता। लकिन सैंसक्स थोड़ा भी गिर जाए तो तीनों क पट मं मरोड़ शुरू हो जाती है। उन्होंन कहा कि यूपीए सरकार दश को बचन पर तुली हुई है। इसी कारण राजग क घटकों न एक साथ मिल कर उस उखाड़ फेंकने का फैसला किया है।ं

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