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चन्द्रयान की कामयाबी

चन्द्रयान की सफलता से कुछ दुखी हैं, ज्यादातर सुखी। आदमी है ही ऐसा ज्वलनशील जानवर कि दूसर की खुशी में सुलगता है और गम में खिलता है। यह इंसान की पहचान है। खासियत है। चरित्र है। मानव के मन का अलिखित संविधान है। यह दीगर है कि कुदरत की रीत इससे उलट है। वहां फूल एक साथ खिलते हैं। सुगन्ध बांटते हैं। ऐसा नहीं होता है कि एक खिले तो दूसरा डाह में मुर्झाए। शायद इसीलिए पश्चिमी विद्वान कहते हैं कि आदमी में जान है, कुदरत तो बेजान है। किसी गुमनाम कवि ने ठीक ही कहा है- ‘वह सुखी है, पड़ोसी जिसका दुखी है।’ कोइ्र माने न माने, आधुनिक भारत के निर्माता लीडर, अफसर और बिल्डर हैं। सत्ताधारी लीडर खुश हैं। चांद तक पहुंचना उनके शासनकाल की उपलब्धि है। उन्हें भरोसा है। कभी न कभी तो वहां आबादी होगी। इतने हिन्दुस्तानी हैं। दुनिया भर में फैले हैं। चांद को भी आबाद करंगे वर्ना समाएंगे कहां? हर दल का नेता अभी से योजना बना रहा है। कैसे गजदंती उसूलों के मुखौटे से जाति, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय के बीज चांद पर बोएं और सत्ता पाएं। ऐसे भी वह धरती पर समृद्धि की सेंध लगातार लगाते लगाते बोर हो चुके हैं। अब चांद का ही आसरा है। अफसरों को सांप सूंघ गया है। यह कम्बख्त वैज्ञानिक टीवी और समाचार-पत्रों में छाए हुए हैं। कैसी नाइंसाफी है। बजट हम बनाते हैं। प्रशासन हम चलाते हैं। नाम यह नाकारा कमाते हैं। सामाजिक प्रतिष्क्ष में इनका क्षाफा होता है। देश इनकी दाद देता है। वेतन तो अपने बराबर हैं ही। इज्जत, सम्मान भी बढ़ा है इन नालायकों का। यहां एक पोस्टिंग के लिए एड़ियां रगड़ते हैं, यह एक ही नियुक्ित पर टिके हैं। हमें साठ के बाद कुरसी, बंगला, कार, चाकर सब बलात छोड़ना पड़ता है। यह हैं कि सठियाते ही नहीं, जमे रहते हैं नौकरी पर। ठेकेदार सपनों में मगन है। चांद पर प्लॅटिंग करगा। फ्लैट बनाएगा। उसने अभी से अधिकारियों को पटाना शुरू कर दिया है। उन्हीं की सांठ-गांठ से उसने पोली और पतन-उत्सुक इमारतें बनाई हैं। बेघर हिन्दुस्तानियों के सिर को छत नवाजी है। मुल्क में विकास की गंगा बहाई है। इसे कुछ गंधाती गटर कहें तो उसकी क्या खता है? यही दायित्व उसे अब चांद पर निभाना है। उसके हाथ में नोट हैं और अंतर में सबको भ्रष्ट करने की लगन। उसे मंजिल पाने से कौन रोक सकता है? चांद गमगीन है। उसकी कलई खुली तो क्या होगा? बच्चे समझदार हैं। चंदा मामा की पोलपट्टी के बाद उन्होंने रिश्तों की असलियत समझ ली है।

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