DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गावसकर बोले, मिस करेगा ड्रेसिंग रूम

ुम्बले की प्रेस कांफ्रेंस चल रही है। मीडिया का पूरा हुजूम कांफ्रेंस हॉल में मौजूद है। हमने देखा सुनील गावसकर लिफ्ट से उतर रहे हैं। हमने उनसे कुंबले के रिटायरमेंट के बार में जानना चाहा। पहले तो उन्होंने साफ मना कर दिया है कि आप इस बार में मेर आने वाले कॉलम का इंतजार करना। फिर थोड़ा रुके, कुछ सोचा और बोले, ‘कुंबले जसा जीवट वाला खिलाड़ी मैंने अपने करियर में नहीं देखा। टीम इंडिया का ड्रेसिंग रूम उन्हें हमेशा मिस करगा।’ लिटिल मास्टर की यह बात वाकई सच है। टीम का एक-एक खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में उन्हें मिस करगा। इतना ही नहीं वे खुद भी टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम को मिस करंगे। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के एक-एक रन को बनते हुए उन्होंने ड्रेसिंग रूम में बैठे देखा है। आज के बाद शायद उन्हें एसा मौका नहीं मिले। मैच खत्म हुआ और अपने पसंदीदा कोटला मैदान का चक्कर लगाने के बाद कुंबले जब पोडियम पर जा रहे थे उस समय उनका पूरा परिवार साथ में था। कुंबले ने जहां बेटी को गोद में उठाया हुआ था तो बेटा मैन ऑफ द मैच लक्ष्मण की उंगली पकड़े था। साथ में पत्नी चेतना भी थीं। पत्नी और बच्चे तो दो दिन पहले ही बेंगलुरु के लिए रवाना होने वाले थे। यहां तक कि वे एयरपोर्ट भी पहुंच गए थे। तभी उन्हें पता चला कि कुंबले के हाथ में चोट लग गई है। उनका बेंगलुरु जाना कैंसिल हुआ और वे सीधा एयरपोर्ट से अपोलो अस्पताल पहुंच गईं। कुम्बले को लोकल एनेस्थीसिया देने के बाद उंगली में 11 टांके लगे। आधे घंटे बाद उन्हें रूम में शिफ्ट कर दिया गया। वहां उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं। यह वही जगह थी जहां दोनों पति-पत्नी ने विचार-विमर्श किया और कुंबले ने अपने रिटायरमेंट का फैसला ले लिया। इस बात को उन्होंने मैच के पांचवें दिन लंच तक किसी को नहीं बताया। जब सभी खिलाड़ियों ने लंच कर लिया तो उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने के निर्णय का खुलासा कर सबको सकते में डाल दिया। उम्मीद यही लगाई जा रही थी कि कुंबले नागपुर टेस्ट के बाद क्रिकेट को अलविदा कह देंगे लेकिन उंगली की चोट ने उन्हें एक टेस्ट पहले ही यह निर्णय लेने को मजबूर कर दिया। एक क्रिकेटर के रूप में अपनी अंतिम प्रेस कांफ्रेंस के बाद कुंबले ड्रेसिंग रूम में गए। वहां शैम्पेन खोल कर इस गमगीन मौके को खुशनुमा मना दिया गया। उधर, कुंबले को विजयी विकेट न देने से निराश क्यूरेटर राधेश्याम, अनिल कुंबले से जुड़ी यादों को टटोलते हुए कहते हैं ‘यह 1ी बात है। कुंबले यहां साउथ जोन की तरफ से खेलने आए थे। उस समय मैं नॉर्थ जोन का कोच था। यहीं कुंबले से मेरी पहली मुलाकात हुई थी। उस समय उनकी बॉलिंग देख कर मुझे लग गया था कि यह लड़का बहुत आगे तक जाएगा।’ यह कहना है कोटला के क्यूरटर राधेश्याम शर्मा का। पिछले लगभग 20 साल से क्यूरटर की जिम्मेदारी निभा रहे राधेश्याम ने आगे कहा, ‘कोटला से कुंबले की इस तरह विदाई होगी यह तो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। मैं उन्हें उनके अंतिम मैच में विजय का तोहफा नहीं दे सका, इसका मुझे हमेशा अफसोस रहेगा। मैंने पूरी कोशिश की थी कि मैं एसा विकेट बनाऊं जो कि यहां भारत को न केवल मैच जिताई बल्कि विश्व चैंपियन के खिलाफ सीरीा पर भी कब्जा करा दे।’ कोटला ही है जहां कुंबले एक पारी में पूर दस विकेट लेने में सफल रहे थे। यह ग्राउंड हमेशा कुंबले का पसंदीदा ग्राउंड रहा है। 1में इसी मैदान पर ईरानी ट्रॉफी का मैच खेला गया था। विकेट विशेष रूप से मनिंदर सिंह के लिए तैयार किया गया था। मनिंदर तो उस मैच में सफल नहीं हुए लेकिन कुंबले जरूर 13 विकेट ले गए और यही प्रदर्शन टीम इंडिया में कुंबले की वापसी का कारण बना। कुंबले के फैसले से निराश राधेश्याम कहते हैं, ‘मैं भी इसके बाद कोटला में क्यूरटर की भूमिका में शायद ही नजर आऊं। कुंबले के लिए अंतिम बार अच्छा विकेट बनाना चाहता था लेकिन किन्हीं कारणों से यह संभव नहीं हो सका। अब भविष्य में शायद ही किसी कुंबले के लिए मैं विकेट तैयार कर सकूं।’ पाकिस्तान के खिलाफ जब कुंबले ने एक ही पारी में 10 विकेट लिए थे तो उस समय भी राधेश्याम ही क्यूरटर थे। जब भी कोटला में कोई मैच होता है तो कुंबले का वह प्रदर्शन सबके जेहन में रहता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गावसकर बोले, मिस करेगा ड्रेसिंग रूम