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समय चुनाव का, पर बचते फिर रहे हैं नेता

चुनाव का वक्त हो और नेता सभाओं-कार्यकर्ताओं से बचें, यह आपको अजीब नहीं लग रहा? कांग्रेस ने अपनी सूची की घोषणा नहीं की है, लेकिन जो नाम लीक हुए हैं, उसको लेकर कार्यकर्ताओं का एक वर्ग खासा गुस्से में है और रो प्रदर्शन कर रहा है। पार्टी के पूर्व विधायक रामसिंह नेताजी को तो बसपा ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वैसे, गुस्सा झेल रहे (या गुस्सा दिला रहे) कांग्रेसी नेता फिलहाल यह कहकर बच निकलने की कोशिश कर रहे हैं कि टिकट अभी फाइनल नहीं हुए हैं और नेतृत्व को बताने-समझाने-मनाने की कोशिश होगी। शायद यह भी एक कारण है कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित रविवार को स्वामी दयानंद बलिदान दिवस कार्यक्रम में गईं। और सबकुछ ठीकठाक रहा! उधर, भाजपा ने दिल्ली चुनावों के लिए शनिवार रात 53 उम्मीदवारों की घोषणा की और वरिष्ठ नेता ओ.पी. कोहली ने उम्मीदवारों के चयन से खफा होकर चुनाव समिति समिति से इस्तीफे की। स्वाभाविक है कि कार्यकर्ताओं के गुस्से का शिकार सबसे अधिक हो रहे हैं पार्टी के सीएम-इन-वेटिंग विजय कुमार मल्होत्रा। रविवार को या तो वे विशम्बर दास मार्ग स्थित अपने घर में रहे या पार्टी दफ्तर में। दोनों ही जगह सुबह से ही असंतुष्टों ने अपना डेरा डाल दिया था। उन्होंने जमकर नारबाजी की और दिनभर धरना दिया। यहां उन्हें ‘मल्होत्राजी आप आगे बढ़ो, दिल्ली की सरकार अब हमारी है’-ौसे नार लगाते लोगों के सामने हाथ हिलाने का मौका नहीं मिला। दरअसल, टिकट के लिए धन्यवाद देने वाले कम थे, मगर असंतुष्टों की संख्या कहीं ज्यादा थी। वैसे, मल्होत्रा ने यह तो माना कि कुछ असंतुष्ट कार्यकर्ता उनसे मिले थे, लेकिन उन्होंने कहा कि रविवार को वे अन्य पार्टी कार्यो में व्यस्त थे, इस कारण उन्होंने कोई जनसभा नहीं की।ं

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