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हड्डी रोग के इलाज में दवाओं की भूमिका नहीं

हड्डी रोग के इलाज में दवाओं की कोई भूमिका नहीं है। किसी भी मरीज के हड्डी टूटने, घुटने में खराबी आने और पीठ की नस दबने पर सिर्फ नश्तर चलाना ही इलाज है। हड्डी की बीमारी में दवाओं से अधिक फिजियोथिरपी की भूमिका है।सेंट्रल इंस्टीच्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स, सफदरजंग हॉस्पीटल, नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डा.(प्रो.) ए. के. सिंह ने बताया कि अधिकांश हड्डी रोग के इलाज में ऑपरशन ही एकमात्र इलाज होता है।ड्ढr ड्ढr किसी भी व्यक्ित की हड्डी टूट जाए, घुटने में खराबी हो अथवा कहीं का नस पर दबाव हो जाए तो इसे किसी भी दवा से दूर नहीं किया जा सकता है। डा. िसंह राज्य सरकार के आमंत्रण पर राजवंशीनगर अस्पताल के विकास और मरीजों के इलाज के लिए पटना आए हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी मरीज को कमर दर्द, पैर में सुन्नपन, दो कदम चलने, खड़े होने में कठिनाई हो तो यह खतर की घंटी है। पैर में नियमित रूप से दर्द रहे तो ऐसी सभी परिस्थियों में हड्डी रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। इनका समय पर इलाज न हो तो बाद में मरीज स्थायी रूप से विकलांग हो सकता है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि स्पाइनल कॉड में दबाव आने से मूत्र त्याग पर नियंत्रण नहीं रह जाता। इसके पूर्व ही कमर दर्द आदि लक्षण मिलने पर मरीज को एक्स-र, सिटी स्कैन और एमआरआई जांच से बीमारी की जांच करा लेना चाहिए कि किस स्थान के नस पर अधिक दवाब हो रहा है। किसी भी मरीज के मूत्र त्याग पर से नियंत्रण हट जाए तो वैसी हालत में कोई भी सर्जरी लाभदायक नहीं हो सकती है। हड्डी रोग से बचाव का बेहतर तरीका है कि जोड़ों का सामूहिक रूप से व्यायाम करं। वातानुकूलित कमर में सिर्फ कैल्सियम की गोली खाने से हड्डी मजबूत नहीं हो सकती । हड्डी को मजबूत बनाने के लिए धूप का सेवन आवश्यक है। धूप में टहलने और त्वचा के माध्यम से होनेवाले मेटाबोलिज्म से ही हड्डियों को विटामिन-डी मिलती है। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए सबसे बेहतर तरीका है प्रकृति के साथ रहें।

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