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हर जिले के दो मंदिरों में दलित पुजारी होंगे: कुणाल

राज्य के सभी मंदिरों का पंजीयन अनिवार्य होगा। हर जिले में कम से कम दो सार्वजनिक मंदिरों में दलित पुजारी बहाल होंगे तथा मंदिरों में संगत-पंगत कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा। बिहार धार्मिक न्यास पर्षद के प्रशासक आचार्य किशोर कुणाल ने रविवार को बताया कि अभी तक पूर राज्य में 50 हजार मंदिर हैं जिनमें 4 हजार मंदिर पंजीकृत हैं। इसलिए सभी सार्वजनिक मंदिरों का बिहार धार्मिक न्यास पर्षद से पंजीयन जरूरी है। जो सार्वजनिक मंदिर पंजीकृत नहीं होंगे धार्मिक न्यास पर्षद बाद में इनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई करगा और पर्षद मंदिर का संचालन अपने अनुरूप करगा।ड्ढr ड्ढr श्री कुणाल ने कहा कि बिहार धार्मिक न्यास पर्षद कार्यालय को पूर्णत: कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है। अब सभी दस्तावेजों को कम्प्यूटर में सुरक्षित रखा जाएगा। क्रमवार सभी निबंधित मंदिरों की सूची बनाई जाएगी जिसमें उसका दस्तावेज, ऐतिहासिक महत्व, कानूनी स्थिति, प्रत्येक वर्ष के बजट का रिकार्ड होगा ताकि बाद में सभी मंदिरों का विस्तृत विवरण मिल सके। पहले चरण में एक हजार मंदिरों की सूची बनेगी और छह माह के अंदर सभी मंदिरों की सूची बन जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक महावीर मंदिर पटना, विशालनाथ मंदिर हाजीपुर, महादेव मंदिर बिहटा, रामजानकी ठाकुरवाड़ी पालीगंज, जगन्नाथ मंदिर बोधगया, राधाकृष्ण मंदिर मनियारी मुजफ्फरपुर में दलित पुजारी हैं। धार्मिक न्यास पर्षद की योजना है कि हर जिले में कम से कम दो सार्वजनिक मंदिरों में दलित पुजारी बहाल होंगे ताकि समाजिक सद्भाव बना रहे। मंदिरों के जमीन जो अवैध कब्जे में थे उसके मुक्त कराने का प्रयास जवरी है। जगन्नाथ मंदिर बोध गया, मुजफ्फरपुर मंदिर कई मंदिरों की जमीन अवैध कब्जे से मुक्त हो चुकी है।

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