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जो बंदरों से बचाएगा, उसी को वोट

हर कोई दहशत में एक-एक पल गुजार रहा है। चौबीसों घंटे घर के दरवाजे बंद रहते हैं। भूल से भी खिड़की या दरवाजे खुले नहीं कि चौखट पर आफत की दस्तक। और तो और बच्चों ने अपने अपार्टमेंट्स या मकान के बाहर खेलना-कूदना तक छोड़ दिया है। जानते हैं वजह क्या है?..बोरिंग रोड इलाके में बंदरों का उत्पात। बंदरों से इस इलाके के लोग इस कदर तंग हैं कि उन्होंने निर्णय किया है, ‘जो बंदरों से बचाएगा, वही वोट पाएगा।’ चार बंदरों का झुंड है। ये बंदर घरों में घुसकर सामान तो तोड़ते ही हैं, महिलाओं को डराकर किचेन और फ्रिा में रखे खाने के सामान भी लेकर भाग निकलते हैं।ड्ढr ड्ढr यही नहीं, ये बंदर चुपके से लोगों के चश्मे भी उतार कर भाग जाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि घर में आने पर बंदर सबसे पहले सो रहे लोगों के कपड़े खींचकर जगाते हैं, फिर तोड़फोड़ करते हैं। बंदरों के डर से भागते समय कई लोग घर में ही गिरकर घायल हो चुके हैं। बोरिंग रोड चौराहा के आसपास के अपार्टमेंट्स और निजी मकानों में बंदरों ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है। मां भगवती काम्प्लेक्स में रहने वाले परिवारों के बच्चों का खेलना-कूदना तक बंद है। इसी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर-206 में रह रहे अवकाश प्राप्त जज आनंद कुमार वर्मा ने बताया कि दो महीनों से यही स्थिति है। चार दिन पहले वह बालकनी में खड़े थे, तभी एक बंदर पीछे से आया और उनका चश्मा उतार कर भाग निकला। सप्ताहभर पहले लक्ष्मी काम्प्लेक्स के पीछे बंदर ने एक व्यक्ित को काट लिया था। रचना वर्मा बताती हैं कि खिड़की के ग्रिल से इन बंदरों का झुंड घर में घुस जाता है। ये बंदर किचेन से खाना उठा लेते हैं और बर्तन दूसर के घरों में गिरा देते हैं। कई बार तो हाथ से भी खाना छीनकर भाग जाते हैं। कपड़े फाड़ देते हैं। बंदर सुबह से रात तक कभी भी आ धमकते हैं। दो बंदर घेर लेते हैं और एक फ्रिा खोलकर खाने का सामान निकाल लेता है। कई तो नल भी खोलकर भाग जाते हैं। रचना का कहना है कि वह अपना वोट तो उसी को देंगी, जो बंदरों के उत्पात से छुटकारा दिलाएगा।

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  • Web Title: जो बंदरों से बचाएगा, उसी को वोट