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प्रज्ञा की गिरफ्तारी महचा नाटक

महाराष्ट्र के मुस्लिमों का मानना है कि मालेगांव और मोडासा बम धमाकों में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी महा राजनीतिक नाटक है। खासकर मालेगांव के मौलानाओं का मानना है कि चुनाव नजदीक है इसलिए मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश की जा रही है जबकि साध्वी पर एटीएस की जांच और कार्रवाई संदेहास्पद है। मुस्लिम समाज को केंद्र और राज्य सरकार पर तब भरोसा होगा जब साध्वी को पोटा के तहत गिरफ्तार किया जाएगा। हालांकि साध्वी के मामले में मुस्लिम समाज सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका से भी फिलहाल चुप है। मगर जांच के नतीजे आने के बाद मुस्लिम समाज मुखर होगा।ड्ढr ड्ढr साध्वी के साथ कई लोगों की गिरफतारी के बाद जहां एक ओर आतंकवाद के बदलते चेहर का आभास हो रहा है, वहीं द्सरी ओर उस संप्रदाय की मानसिकता भी उाागर हो रही है जो अब तक इस तरह के आरोपों से तनावग्रस्त थी। लेकिन साध्वी सहित अन्यों के खिलाफ जांच प्रक्रियाओं से मुस्लिम समाज अभी इस तनाव से उबर नहीं पाया है। मालेगांव में अपने गांधीवादी चरित्र के लिए प्रसिद्ध मौलाना अब्दुल हमीद अजहरी का मानना है कि इस जांच में साध्वी के तार को नांदेड़ और नागपुर के धमाके से भी जोड़ कर देखा जाना चाहिए।ड्ढr ड्ढr उन्होंने इस जांच में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलास राव देशमुख की भूमिका गुजरात के मुख्यमंत्री नरंद्र मोदी की तरह बताया है। इधर जमाते इस्लामी हिंद के सेक्रेटरी मुजतबा फारूक ने साध्वी पर पोटा लगाने की मांग की है। लगभग यही विचार अन्य मुस्लिम संस्थाओं का भी है। जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद इस्माईल कासिमी सवाल प्छते हैं कि कया इस देश में हिन्द् और मुसलमान दोनों के लिए अलग-अलग कान्न हैं? राा अकेडमी के अध्यक्ष डाक्टर रईस रिावी के अनुसार जिस तरह अबतक आतंकवाद के नाम पर होने वाले गिरफतार मुस्लिम युवकों के साथ कठोरता से निपटा गया, उसी तरह इन आरोपियों पर भी कठोर कार्रवाई हो।

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