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महाराष्ट्र की नफरत पर सियासत तेज

महाराष्ट्र में बिहारियों पर हमले व बिहारी आत्मसम्मान को लेकर सूबे की राजनीति एकबार फिर गरमा गई है। इस मुद्दे पर अबतक साथ दिखने वालीं पार्टियां अपनी-अपनी राग अलापने लगे हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने रविवार को जदयू पर पलटवार करते अपने साथ ही पार्टी के सभी केन्द्रीय मंत्रियों, सांसदों (लोकसभाराज्यसभा), विधायकों व विधानपार्षदों के 15 नवम्बर तक इस्तीफे की पेशकश कर डाली। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी अपने घटक दलों के सभी सांसदों एवं विधायकों के साथ जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा के समक्ष ‘किरिया’ (शपथ) लेकर सामूहिक इस्तीफा देने का आग्रह किया। प्रसाद ने कहा कि उन्होंने रविवार से ही अपने सांसदों एवं विधायकों से इस्तीफा लेना शुरू कर दिया है।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अगर मेर इस्तीफा देने से बिहारियों पर हमले रुक जाएं तो मैं सुबह तक का भी इंतजार नहीं करूंगा। रल मंत्री की पहल से तो महाराष्ट्र की बजाय बिहार में ही राष्ट्रपति शासन लग जायेगा। कुमार ने कहा कि जदयू ने पहल करके लालू को यूपीए में अपनी ताकत दिखाने का ऐतिहासिक मौका दिया है, जिसकी बदौलत आधी रात में उन्होंने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगावाया था। लालू या तो महाराष्ट्र को धारा 355 के तहत नोटिस भिजवाएं अथवा केन्द्र सरकार से नाता तोड़ें। मुख्यमंत्री ने भाजपा को भी शिवसेना से अपने संबंधों पर पुनर्विचार की सलाह दी है। उधर केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री डा. शकील अहमद ने भी बिहार के मान-सम्मान की रक्षा के लिए केन्द्रीय मंत्री पद और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे का ऐलान किया। वह कांग्रेस के बाकी बिहारी सांसदों व विधायकों से भी इस सिलसिले में बात करंगे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता डा. अशोक कुमार से उनकी बात हुई है और वे भी उनसे सहमत हैं। उधर लालू प्रसाद ने कहा कि अपने चंद सांसदों से इस्तीफा दिलवाने की घोषणा करवाकर बिहारी नेताओं एवं दलों की एकता को नीतीश कुमार ने ही खंडित किया है। इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि नीतीश उनके इस आग्रह को स्वीकार करंगे तथा एक साथ इस्तीफा देंगे।ड्ढr ड्ढr इतना ही नहीं ‘निर्दलीय अभियान समिति’ बनाकर एक साथ सूबे के सभी दलों के नेता पूर देश का दौरा करेंगे। देशवासियों को बताएंगे कि देश की एकता, अखंडता और धर्मनिरपेक्षता के लिए बिहारियों ने संघर्ष शुरू कर दिया है। हम भारतीय हैं और क्षेत्रियता के खिलाफ हैं। बिहार महाराष्ट्रवासियों से नहीं बल्कि बाल ठाकर एवं उनके खानदान के कुकृत्यों का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब नीतीश कुमार सर्वदलीय मीटिंग बुलाएं और सभी दल एक साथ सांसदों एवं विधायकों के इस्तीफा की घोषणा कर संघर्ष में कूदें। इसकी अगुवाई चाहे तो नीतीश कुमार करं या वे कहें तो मैं भी करने को तैयार हूं। साथ ही यह भी तय हो कि शिवसेना या बाल ठाकर के खानदान के साथ जो दल गठबंधन करगा, माना जाएगा कि वह देशद्रोही है। प्रसाद ने कहा कि अब यह नहीं चलेगा कि शिवसेना के साथ एनडीए में भी रहिए और विरोध भी कीजिए। इधर कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद और रामविलास पासवान की मुट्ठी में यूपीए सरकार की जान है। वह सच्चे दिल से चाह लें तो दिल्ली की सरकार हिल जायेगी।

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