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बाढ़ प्रभावित जिलों में जाएंगे कृषि वैज्ञानिक

राज्य के कृषि वैज्ञानिक अब बाढ़ प्रभावित जिलों के किसानों का दरवाजा खटखटायेंगे। वहां समस्याओं का अंबार होगा तो वैज्ञानिकों के सामने तबाह गांवों में खेती शुरू कराने की चुनौती भी होगी। ‘कृषि वैज्ञानिक गांव की ओर’ योजना के तहत उन जिलों में कार्यक्रम की तिथियां तय कर दी गई। पूर्णिया, अररिया, सुपौल और मधेपुरा जिलों में इस कार्यक्रम की शुरुआत 13 नवम्बर से की जायेगी। अब बामेति ने उन जिलों की ‘आत्मा’ के परियोजना निदेशकों को पत्र लिखकर प्रखंड स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तिथि निर्धारित करने को कहा है। परियोजना निदेशकों को दस नवम्बर तक कार्यक्रमों की सूची मुख्यालय को उपलब्ध करा देनी है।ड्ढr ड्ढr कृषि मंत्री नागमणि ने बताया कि 15 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक यह कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में आयोजित किया गया। किसानों के बीच लोकप्रियता हासिल करने वाला यह कार्यक्रम अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी आयोजित किया जायेगा। उन इलाकों में किसानों की समस्याएं कुछ अलग तरह की होंगी। इसलिए ऐसे विशेषज्ञ वहां किसानों को सलाह देने के लिए लगाये जायेंगे जो बाढ़ के कारण मिट्टी की बदली संरचना के अनुसार खेती का तरीका बता सकें। उन इलाकों में जाने वाले वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी भी दोहरी होगी। किसानों की समस्याओं का निराकरण भी उन्हें करना है साथ ही उन इलाकों का खुद भी अध्ययन करना होगा कि कैसे वहां खेती को सहा बनाया जा सके।

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