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मौत मिली मगर नहीं मिला पति का हक

शिष्यों को ईमानदारी का सबक देते समय मुरारीकृष्ण वर्मा ने सोचा भी न होगा कि यह उनके परिजनों पर ही भारी पड़ जाएगा। पटना के श्रीश्यामसुन्दर उच्च विद्यालय, मिसी में प्रधानाध्यापक रहते 25 अगस्त 1ो उनका निधन हो गया। उनको गुजर 16 साल से अधिक हो गए हैं मगर आज तक उनके परिजनों को सरकार से न्याय नहीं मिल सका। पहुंच-पैरवी के अभ्यस्त सरकारी तंत्र में उनके सेवांत लाभ की फाइल रुकी पड़ी है। उनकी पत्नी धर्मशीला वर्मा ने कसम खाई थी कि बिना रिश्वत दिए ही वह अपने पति के सार बकाए और अन्य सेवांत लाभों का भुगतान करा लेंगी। पति के आदशोर्ं पर चलते हुए वह 13 साल तक अधिकारियों से फरियाद करती रहीं और अनुरोध पत्र लिखती रहीं। मगर अंतत: वह टूट गईं। इस बाबत 12 जून 2005 को विभाग को लिखा उनका आवेदन आखिरी साबित हुआ। इसके 10 दिन बाद ही 26 जून 2005 को हृदय गति रुकने से उनका भी निधन हो गया। मगर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दिल फिर भी नहीं पसीजा। विभाग की इस निष्ठुरता की सूचना ‘हिन्दुस्तान’ की तरफ से प्रधान शिक्षा सचिव अंजनी कुमार सिंह को दी गई तो वह चौंक पड़े। उन्हें सहसा विश्वास नहीं हुआ कि एक दिवंगत शिक्षक के परिजन 16 वर्षो से न्याय के लिए विभाग में ठोकरं खा रहे हैं। उन्होंने तत्काल संबंधित फाइल की मांग माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से की। उन्होंने कहा कि वह खुद इस मामले की छानबीन करंगे। नालंदा जिले के निवासी स्व. वर्मा के पुत्र संजय का कहना है कि उनके पिता के सेवांत लाभों में वेतन निर्धारण, अंतर राशि, उपादान की राशि एवं छुट्टी की पूरी राशि का भुगतान और अंतिम पेंशन राशि का निर्धारण होना है।ं

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